
देहरादून — प्रदेशभर से आई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने मंगलवार को मानदेय वृद्धि, सेवानिवृत्ति पर पेंशन और अन्य मांगों को लेकर सचिवालय कूच किया। लेकिन सुभाष रोड पर भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कार्यकत्रियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया और मांगें जल्द पूरी करने की अपील की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी, सामाजिक सुरक्षा और कार्यभार में संतुलन जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से देहरादून में एकत्रित हुई इन महिलाओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई और बढ़े हुए कार्यभार के बावजूद उनका मानदेय वर्षों से नहीं बढ़ाया गया।
सचिवालय कूच और पुलिस की रोक
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां मंगलवार सुबह सचिवालय की ओर बढ़ीं, लेकिन सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। महिलाएं सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार अलग-अलग मंचों पर उनकी भूमिका की सराहना करती है, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठा रही।
उन्होंने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी भेजा है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का समर्थन
आंदोलन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी मौके पर पहुंचे और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इनका कार्यभार तीन से चार गुना बढ़ा दिया है, लेकिन मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई। उन्होंने इसे कर्मचारियों के साथ शोषण बताते हुए कहा कि महंगाई बढ़ने से इन महिलाओं के सामने परिवार चलाने की चुनौती और बढ़ गई है।
हरीश रावत ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सरकार ने अनेक कार्यक्रमों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को शामिल किया, लेकिन उनके मानदेय को बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि 2027 में कांग्रेस सत्ता में आती है तो आंगनबाड़ी, भोजन माताओं और आशाओं को न्यूनतम आमदनी की गारंटी दी जाएगी।
आंगनबाड़ी संगठन की मांगें
उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष सुशीला खत्री ने बताया कि मार्च 2024 में आंदोलन के दौरान सरकार ने मानदेय बढ़ाने को लेकर कमेटी गठन का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक इस कमेटी की कार्यवाही स्पष्ट नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए और तब तक उनका मानदेय 24 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में सुपरवाइजर के खाली पदों को कार्यकत्रियों के प्रमोशन से भरा जाए, ग्रेच्युटी लाभ लागू किया जाए और फेस कैप्चर प्रणाली बंद की जाए, क्योंकि इससे वास्तविक लाभार्थी सेवा से वंचित हो रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई महिलाओं ने कहा कि वर्षों से उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता रहा है। उनका कहना है कि कोरोना काल से लेकर आज तक उन्होंने कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन मानदेय में वृद्धि न होने से उनका आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आगे क्या?
आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द समाधान नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि ज्ञापन को संबंधित विभागों तक पहुंचाया जाएगा और मांगों पर विचार किया जाएगा।






