
देहरादून—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में उत्तराखंड के एडवेंचर टूरिज्म और शीतकालीन पर्यटन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा राज्य के पर्यटन को नई दिशा दे सकती है। उनके बयान पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड का एडवेंचर टूरिज्म और विंटर डेस्टिनेशन पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इन पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य को शीतकालीन यात्रा के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि सर्दियों में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने एडवेंचर टूरिज्म, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत को राज्य का प्रमुख आकर्षण बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कटाक्ष
प्रधानमंत्री के कथन पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जब किसी राज्य में चुनाव नजदीक आते हैं, प्रधानमंत्री उसी प्रदेश की बात अधिक करने लगते हैं। गोदियाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि मोदी पहले ही ‘घाम तापो’ परियोजना को कारगर बता चुके हैं, इसलिए अब लोग धूप सेंकने में ही विशेषज्ञ बन गए हैं।
बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस पर पलटवार करते हुए बीजेपी प्रदेश महामंत्री दीप्ति भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को अपनी याददाश्त सुधारनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा उत्तराखंड का जिक्र किया है—चाहे ‘मेड इन उत्तराखंड’ की बात हो, इन्वेस्टर समिट, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन डेस्टिनेशन’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल’, बटर फेस्टिवल, या आदि कैलाश व केदारनाथ जैसे आध्यात्मिक स्थलों का उल्लेख।
उन्होंने कहा कि चुनाव अभी दूर हैं और प्रधानमंत्री उत्तराखंड के विकास को लेकर लगातार प्रतिबद्ध रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
टूरिज्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा मिलना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर शुरू हुई बयानबाजी को चुनावी माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।
आगे क्या?
प्रधानमंत्री के कथन के बाद उम्मीद है कि केंद्र और राज्य मिलकर शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठाएँगे। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच पर्यटन उद्योग इस दिशा में ठोस नीति की उम्मीद कर रहा है।







