
हरिद्वार: राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में एक शिशु हाथी की ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई। हावड़ा–देहरादून एक्सप्रेस से हुई टक्कर के बाद हाथी का बच्चा इंजन के नीचे फंस गया और मौके पर ही उसकी जान चली गई। घटना के बाद दो घंटे तक रेल यातायात बाधित रहा, जबकि वन विभाग और जीआरपी की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटीं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राजाजी टाइगर रिजर्व का मोतीचूर क्षेत्र हाथियों के मूवमेंट का प्रमुख मार्ग माना जाता है। यहां वन्य जीव अक्सर रेलवे लाइन पार करते हैं और पूर्व में भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। लगातार बढ़ते रेल यातायात और धुंध जैसे मौसमीय कारक इस वन क्षेत्र में जोखिम बढ़ाते हैं।
आधिकारिक जानकारी
हादसा मोतीचूर रेलवे स्टेशन और रायवाला के बीच खड़खड़ी उत्तरी बीट में उस समय हुआ, जब हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। तेज रफ्तार में आ रही हावड़ा–देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन शिशु हाथी को टक्कर मार गई। बताया गया कि इंजन के नीचे फंसने से हाथी की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
ACF अजय लिंगवाल ने बताया कि शिशु हाथी की उम्र लगभग 5 से 7 वर्ष के बीच थी। टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद शव को ट्रैक से हटाया गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उनके अनुसार, “गश्त बढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए ट्रैक पर सिग्नलिंग और निगरानी बढ़ाने की मांग की।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि “धुंध और तेज रफ्तार के कारण हादसे की आशंका हमेशा बनी रहती है, यहां सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए।”
विशेषज्ञ टिप्पणी
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के कॉरिडोर से गुजरने वाली रेल लाइनों पर गति नियंत्रण और तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता है। उनका कहना है कि धुंध, अंधेरा और तेज रफ्तार—ये तीनों संयुक्त रूप से ऐसे हादसों का कारण बनते हैं।
आगे क्या?
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ट्रेन की रफ्तार निर्धारित सीमा से अधिक थी और धुंध के कारण दृश्यता कम थी। हादसे के बाद वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है और गश्त बढ़ाने तथा निगरानी तंत्र मजबूत करने की बात कही है। मामले में दर्ज मुकदमे के बाद आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।






