
खटीमा के किलपुरा वन रेंज में शनिवार को हाथी के बच्चे का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। पिछले एक माह में क्षेत्र में हाथी के दो बच्चों की मौत सामने आ चुकी है, जिससे तराई पूर्वी वन प्रभाग में चिंता बढ़ गई है। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
तराई पूर्वी वन प्रभाग हाथियों की सक्रियता वाला क्षेत्र माना जाता है। पिछले कुछ महीनों से हाथियों व उनके बच्चों की असामान्य मौतों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। लगभग बीस दिन पहले भी चकरपुर जंगल में पांच माह के हाथी के बच्चे का शव मिला था, जिसकी मौत वन्यजीव संघर्ष में हुई थी। अब दूसरा मामला सामने आने से विभाग सतर्क हो गया है।
घटनास्थल की स्थिति और प्रारंभिक जांच
शनिवार को रेंजर मनोज कुमार पांडे के निर्देश पर वन विभाग की टीम नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान पश्चिमी किलपुरा द्वितीय क्षेत्र में मृत हाथी का बच्चा दिखाई दिया। टीम ने तुरंत रेंजर को सूचना दी, जिसके बाद डीएफओ हिमांशु बागड़ी और एसडीओ संचिता वर्मा मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच की।
अधिकारियों ने बताया कि मृत हाथी लगभग चार वर्ष का नर था। शरीर और दांत सुरक्षित मिले हैं और शव दो से चार दिन पुराना प्रतीत हो रहा है। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, जिसके बाद पोस्टमॉर्टम कराया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किलपुरा और आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधि सामान्य है, लेकिन लगातार दो हाथी के बच्चों की मौत से स्थानीय लोग भी चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का झुंड अक्सर इस क्षेत्र से गुजरता है, इसलिए मौत के कारणों की सही जांच होनी बेहद जरूरी है। लोगों ने वन विभाग से सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की मांग की है ताकि वन्यजीवों पर प्रभाव डालने वाले किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके।
पोस्टमॉर्टम और विभागीय कार्रवाई
हाथी के बच्चे का पोस्टमॉर्टम तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक टीम ने किया। खटीमा के पशु चिकित्साधिकारी राजेंद्र राम, वन विभाग के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सती और डॉ. हिमांशु ने संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार की। अधिकारियों के अनुसार, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।
पूर्व मामले में, 9 नवंबर को चकरपुर बीट में पांच माह के हाथी के बच्चे की मौत वन्यजीव संघर्ष में हुई थी और उसके शरीर पर बाघ के पंजों के निशान भी मिले थे। नया मामला इससे भिन्न परिस्थितियों में सामने आया है, इसलिए विभाग हर एंगल से जांच कर रहा है।
आगे क्या?
वन विभाग ने जांच तेज कर दी है और आने वाले दिनों में क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होने की उम्मीद है। देर शाम मृत हाथी के बच्चे को सुरक्षित तरीके से दफना दिया गया।





