
देहरादून: देहरादून की दो आवासीय परियोजनाओं में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। मुख्य आरोपी बिल्डर शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी गर्ग 17 अक्टूबर से लापता हैं। बढ़ती शिकायतों के बीच राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज होने पर आईजी गढ़वाल ने सीओ मसूरी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय एसआईटी गठित कर दी है, जबकि क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने दोनों के पासपोर्ट निरस्त कर दिए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून में हाल के वर्षों में रियल एस्टेट में धोखाधड़ी की शिकायतें बढ़ी हैं। इंपीरियल वैली और आर्केडिया हिलाक्स परियोजनाओं में निवेशकों ने आरोप लगाया था कि बिल्डर दंपती ने फ्लैट बुक कराने के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले, लेकिन न तो रजिस्ट्री कराई गई और न ही परियोजनाओं की वैधता संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
आधिकारिक जानकारी
राजपुर थाने में दर्ज मुकदमे में शाश्वत गर्ग, पत्नी साक्षी गर्ग, उनके पिता, मां और दो सालों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार दंपती 17 अक्टूबर से बेटे के साथ लापता है। उनकी गाड़ी हरिद्वार की पार्किंग में मिली थी।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गोल्डन एरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फर्जी दस्तावेज बनाकर बैंक और वित्तीय संस्थानों से करोड़ों रुपये का ऋण लिया गया। एमडीडीए को आवश्यक दस्तावेज न देने पर रेरा ने परियोजना की रजिस्ट्री रोक दी थी। जांच में सामने आया कि कई फ्लैटों के जाली एग्रीमेंट, अलॉटमेंट और सेल एग्रीमेंट तैयार किए गए।
आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि “मामले की गंभीरता को देखते हुए पाँच सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है और विवेचना जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।”
एसआईटी टीम में शामिल अधिकारी:
- सीओ मसूरी मनोज असवाल – अध्यक्ष
- इंस्पेक्टर विद्याभूषण नेगी
- थाना राजपुर प्रभारी प्रदीप रावत
- प्राथमिक विवेचक
- रेंज कार्यालय का एक दरोगा
दूसरी ओर पासपोर्ट क्षेत्रीय कार्यालय ने दोनों के पासपोर्ट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। क्षेत्रीय अधिकारी विजय शंकर पांडे के अनुसार इंपीरियल वैली और आर्केडिया हिलाक्स के निवेशकों की सामूहिक शिकायत पर यह निर्णय लिया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और निवेशकों का कहना है कि दंपती के फरार होने से उनकी आर्थिक सुरक्षा और आशाओं को भारी झटका लगा है। कुछ निवेशकों ने बताया कि दंपती नेपाल भाग गया है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस लगातार सीमावर्ती एजेंसियों से संपर्क कर रही है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में रेरा और विकास प्राधिकरणों के दस्तावेजों की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। बड़े प्रोजेक्टों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
आगे क्या?
एसआईटी अब धन प्रवाह, बैंक दस्तावेज, रेरा और एमडीडीए से संबंधित अनुमतियों की जांच कर रही है। दंपती की लोकेशन ट्रेस करने के लिए यूपी, उत्तराखंड और नेपाल के सुरक्षा एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।







