
हरिद्वार में 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगा किनारे संतों और सभी 13 अखाड़ों के आचार्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने 10 प्रमुख स्नान तिथियों की घोषणा की और बताया कि इस बार चार शाही अमृत स्नान आयोजित होंगे, जो सदियों पुरानी परंपरा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कुंभ 2027 को दिव्य और भव्य रूप में आयोजित करने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के कारण संक्षिप्त कुंभ आयोजित हुआ था, लेकिन 2027 का आयोजन कई दृष्टियों से ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या 2010 और 2021 की तुलना में कई गुना अधिक होने की संभावना है।
गंगा तट पर पहली बार हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने संतों से सुझाव लिए और कहा कि कुंभ की सभी तैयारियों में उनकी परंपराओं और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित स्नान तिथियाँ
मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के दौरान 2027 कुंभ मेले की 10 प्रमुख स्नान तिथियों की घोषणा करते हुए बताया कि इनमें चार शाही अमृत स्नान भी शामिल हैं।
घोषित महत्वपूर्ण स्नान तिथियाँ:
- 14 जनवरी 2027 — मकर संक्रांति
- 6 फरवरी 2027 — मौनी अमावस्या
- 11 फरवरी 2027 — वसंत पंचमी
- 20 फरवरी 2027 — माघ पूर्णिमा
- 6 मार्च 2027 — महाशिवरात्रि (अमृत स्नान)
- 8 मार्च 2027 — फाल्गुन अमावस्या (अमृत स्नान)
- 7 अप्रैल 2027 — नव संवत्सर
- 14 अप्रैल 2027 — मेष संक्रांति (अमृत स्नान)
- 15 अप्रैल 2027 — श्रीराम नवमी
- 20 अप्रैल 2027 — चैत्र पूर्णिमा (अमृत स्नान)
सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी, स्वास्थ्य और फायर विभाग सहित सभी इकाइयाँ संयुक्त रूप से काम करेंगी। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है।
नगर और घाट क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए विशेष टीमें गठित होंगी। कचरा प्रबंधन, जल निकासी और पर्यावरण संरक्षण पर अलग से काम किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हरिद्वार में आयोजन स्थल के पास मौजूद स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि कुंभ की घोषणाओं से शहर में उत्साह बढ़ा है।
एक स्थानीय दुकानदार का कहना था— “कुंभ हमारे लिए सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि रोज़गार का भी सबसे बड़ा पर्व है। तैयारी जल्द शुरू होना अच्छी बात है।”
संत समाज ने भी मुख्यमंत्री की पहल की सराहना की और कहा कि राज्य सरकार परंपराओं के अनुरूप कार्य कर रही है।
अखाड़ों में विवाद की स्थिति
बैठक के दौरान एक विवाद भी सामने आया। आवाहन अखाड़े के प्रतिनिधियों को नाम न होने का हवाला देकर बैठक से बाहर कर दिया गया, जबकि अखाड़े के अनुसार उन्हें आधिकारिक निमंत्रण मिला था और पुलिस एस्कॉर्ट के साथ वे बैठक स्थल तक पहुंचे थे। प्रतिनिधियों ने इसे अपमानजनक बताया और कहा कि इसके बाद अखाड़ा क्या फैसला लेगा, यह समय बताएगा।
श्रीमहंत गोपाल गिरी महाराज ने आरोप लगाया कि उनकी उपस्थिति पर कुछ संतों ने आपत्ति जताई, जिसके चलते उन्हें बैठक से बाहर किया गया।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत दिवाकर भट्ट के परिवार से की मुलाकात
बैठक के बाद मुख्यमंत्री धामी हरिद्वार स्थित शिवलोक में राज्य आंदोलनकारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवंगत दिवाकर भट्ट के घर भी पहुंचे।
उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।







