
बदरीनाथ (चमोली): श्री बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार, 25 नवंबर 2025 को परंपरागत वैदिक विधि-विधान और भक्तिमय माहौल के बीच शीतकाल के लिए विधिवत् बंद कर दिए गए। कपाट बंद होते ही इस वर्ष की यात्रा अवधि का औपचारिक समापन भी हो गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चारधाम यात्रा का यह अंतिम चरण हमेशा विशेष महत्व रखता है। कपाट बंद होने की परंपरा सदियों से आस्था, श्रद्धा और पौराणिक विधि-विधान का प्रतीक रही है। हर वर्ष शीतकाल शुरू होने के साथ ही बदरीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान बदरीविशाल की शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर में संपन्न होती है।
आधिकारिक जानकारी
धाम परिसर में तड़के से ही मेलों जैसा वातावरण रहा। पुजारियों द्वारा ब्रह्मकमल अर्पण, महाभोग, अंतिम आरती और वैदिक मंत्रोच्चार की पवित्र ध्वनि के बीच कपाट “जय बदरीविशाल” के जयघोष के साथ बंद किए गए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने कपाट बंद होने की इस दिव्य परंपरा के दर्शन किए।
प्रशासन के अनुसार यात्रा अवधि के सफल संचालन में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन दल और अन्य विभागों का समन्वय महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और यात्रा शांतिपूर्वक सम्पन्न हुई।
कपाट बंद होने के साथ अब शीतकाल में भगवान बदरीविशाल की पूजा-अर्चना पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी मंदिर में की जाएगी, जहां छह महीने तक परंपरा अनुसार दर्शन और पूजा जारी रहेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कपाट बंद होने के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि यह क्षण अत्यंत भावनात्मक होता है। कई भक्तों ने बताया कि वैदिक रीति से सम्पन्न होने वाली यह परंपरा हिमालयी संस्कृति और आस्था की अनोखी पहचान है।
आगे क्या
कपाट बंद होते ही बदरीनाथ क्षेत्र में शीतकालीन व्यवस्थाएं लागू हो जाएंगी। प्रशासन ने कहा है कि अगले वर्ष कपाट खुलने तक धाम क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षा, रखरखाव और नियंत्रण उपाय जारी रहेंगे।







