
डोईवाला: डोईवाला क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय लोग परेशान हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बाद वन विभाग ने अब ड्रोन की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी शुरू कर दी है, जबकि क्विक रिस्पांस टीम (QRT) भी वन सीमाओं पर 24 घंटे सक्रिय है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कई हफ्तों से डोईवाला और आसपास के वन सीमांत क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही बढ़ गई थी। हाथियों के बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश से ग्रामीणों में भय का माहौल है। माजरी ग्रांट में हाथी ने कई घरों की चहारदीवारी तोड़ दी थी और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया था।
इसी दौरान शनिवार सुबह टहलने निकले ओएनजीसी के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी पर हाथी ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
आधिकारिक जानकारी
हाथियों की बढ़ती गतिविधि को देखते हुए वन विभाग ने डोईवाला क्षेत्र में ड्रोन निगरानी शुरू कर दी है। गन्ने के खेतों में हाथी अक्सर दिखाई नहीं देते, ऐसे में ड्रोन की मदद से उनकी वास्तविक स्थिति और दिशा का पता लगाना आसान हो गया है।
विभाग का कहना है कि हाथी जैसे ही आबादी की ओर बढ़ते हैं, ड्रोन फीड से तुरंत जानकारी मिल जाएगी और टीम समय रहते कार्रवाई कर सकेगी।
लच्छीवाला वन क्षेत्राधिकारी मेधावी कीर्ति ने बताया कि ड्रोन निगरानी के साथ-साथ क्विक रिस्पांस टीम (QRT) लगातार क्षेत्रों की गश्त कर रही है। टीम का प्रयास हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर खदेड़ने और किसी भी संभावित खतरे को रोकने का है।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है।
एक किसान ने बताया कि “गन्ने की फसल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हाथी रात–रात भर खेतों में घूमते हैं, ऊपर से वे गन्ने में छिप जाते हैं, जिससे उन्हें देख पाना भी मुश्किल हो जाता है।”
लोगों ने उम्मीद जताई कि ड्रोन निगरानी से घटनाएं कम होंगी और समय रहते सूचना मिलने से खतरा टल सकेगा।
आगे क्या
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथियों की गतिविधियों पर अगले कुछ दिनों तक विशेष नजर रखी जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जाएंगी। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखाई देने पर वन विभाग को तुरंत सूचना दें और अकेले जंगल की ओर जाने से बचें।







