
कालाढूंगी: कालाढूंगी वन निगम डिपो से सागौन की अवैध निकासी का बड़ा मामला रविवार को सामने आया, जब वन विभाग ने मुखबिर की सूचना पर एक ट्रक से रवन्ने में दर्ज मात्रा से कहीं अधिक लकड़ी बरामद की। लगभग आठ लाख रुपये मूल्य की अतिरिक्त सागौन मिलने से डिपो की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वन निगम के डिपो से लकड़ी की निकासी तय रवन्ने (अनुमति पर्ची) के आधार पर होती है। डिपो में अधिकारी, स्केलर और ठेकेदार की उपस्थिति में लकड़ी वाहन में लोड की जाती है और गेट पर अंतिम जांच के बाद ट्रक को आगे भेजा जाता है। इसके बावजूद अक्सर अधिक मात्रा में लकड़ी निकाले जाने के संदेह उठते रहे हैं। रविवार का मामला इन्हीं शंकाओं को और मजबूत करता है।
अधिकारिक जानकारी
सूचना मिलने पर कालाढूंगी रेंज की टीम ने नयागांव बैरियर के पास ट्रक (यूके 04 सीसी 9453) को रोका और जांच की।
जांच में सामने आया कि—
- रवन्ने में लकड़ी 17 घनमीटर दर्ज थी,
- जबकि ट्रक में 22 घनमीटर लकड़ी निकाली गई थी।
- कुल 38 गिल्टे सागौन अतिरिक्त पाए गए।
पकड़ी गई लकड़ी की कीमत लगभग ₹8 लाख आंकी गई है।
रामनगर डीएफओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने बताया कि ट्रक को सीज कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है।
उन्होंने मुखबिर का नाम गुप्त रखते हुए ₹5,000 के इनाम की भी घोषणा की।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम डिपो में लंबे समय से अवैध लकड़ी निकासी का संदेह रहा है।
एक निवासी ने कहा, “डिपो के अंदर मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी ट्रक में नहीं चढ़ सकती। यह जांच बहुत जरूरी है।”
वन निगम का पक्ष
वन निगम रामनगर की प्रभागीय विक्रय प्रबंधक सावित्री गिरी ने कहा, “मामला संज्ञान में है। लकड़ी की नापजोख की जाएगी। यदि तय रवन्ने से ज्यादा सागौन मिला तो जांच के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- तय रवन्ने से 38 गिल्टे अधिक लकड़ी कैसे लोड हुई?
- जब हर चरण में अधिकारी मौजूद रहते हैं तो निगरानी में चूक कैसे हुई?
- क्या यह एक दिन की लापरवाही है या लंबे समय से चल रहा संगठित घपला?
वन विभाग अब इन सभी बिंदुओं पर जांच की तैयारी में है।
आगे क्या
जांच टीम लकड़ी की माप, रवन्ने के रिकॉर्ड, डिपो प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी। आने वाले दिनों में दोषी पाए जाने पर निलंबन, प्राथमिकी या प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना है।






