
पौड़ी गढ़वाल में बढ़ते गुलदार और अन्य वन्यजीवों के हमलों को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि विभाग की लापरवाही जारी रही तो पहाड़ के लोग अपनी सुरक्षा के लिए “बंदूक उठाने” पर मजबूर हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत बढ़ने के बीच यह बयान सरकार और वन विभाग के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बीते महीनों में पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और चंपावत जिलों में गुलदार और भालू के हमलों की घटनाएँ लगातार बढ़ी हैं। कई जगहों पर लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। महिलाएँ जंगलों में जाना बंद कर रही हैं और खेत–खलिहान तक असुरक्षित हो चुके हैं।
आधिकारिक / राजनीतिक बयान
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने वन विभाग पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि विभाग “कागजों में सक्रिय” है, जबकि ज़मीनी स्तर पर लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भयभीत हैं।
उन्होंने कहा: “सरकार और विभाग तय करें कि वे लोगों की जान बचाएंगे या नहीं। अगर व्यवस्था फेल होगी, तो पहाड़ का आदमी अपनी रक्षा खुद करेगा—जरूरत पड़ी तो बंदूक उठानी पड़े, तो भी हम पीछे नहीं हटेंगे।”
गोदियाल ने यह भी कहा कि पिछले कई महीनों में ग्रामीणों ने बार–बार शिकायतें कीं, लेकिन ट्रैपिंग, निगरानी और गश्त जैसी कार्रवाई पर्याप्त नहीं दिखी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही लोग घरों से निकलने में डरते हैं। कई गांवों में बच्चे स्कूल जाने में भी भय महसूस कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि फसलें, मवेशी और घरों के आस-पास की सुरक्षा लगातार खतरे में है।
मांगें और सुझाव
गणेश गोडियाल ने सरकार से मांग की कि हमलावर वन्यजीवों की शीघ्र पहचान कर उन पर नियंत्रण के प्रभावी उपाय किए जाएँ। प्रभावित गांवों में ट्रैपिंग टीमें तैनात हों, रात के समय गश्त बढ़ाई जाए और ग्रामीणों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि वन विभाग की लापरवाही की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। गोडियाल का कहना है कि पहाड़ के लोगों का धैर्य अब टूटने लगा है और सरकार को इसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में लेना चाहिए।
आगे क्या
मामले पर वन विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने और वन्यजीव नियंत्रण की योजनाओं पर जल्द निर्णय लिया जा सकता है।







