
ऋषिकेश: अमावस्या के अवसर पर गुरुवार को शहर के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के सुबह से ही लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष प्रबंध किए। दोपहर तक स्नान का सिलसिला जारी रहा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अमावस्या पर गंगा स्नान की परंपरा हर वर्ष ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान से पापों का क्षय होता है और मन, शरीर एवं आत्मा की शुद्धि होती है। तीर्थनगरी में यह आस्था वर्षों से स्थानीय और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही है।
अधिकारिक जानकारी
गुरुवार सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का घाटों पर जुटना शुरू हो गया था। त्रिवेणीघाट, लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, तपोवन, 72 सीढ़ी, साईंघाट, श्यामपुर और हरिपुरकलां सहित कई स्थानों पर भक्तों ने गंगा स्नान किया।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, बैरिकेडिंग, लाइफ जैकेट व्यवस्था और चौकसी बढ़ाई गई थी। दिनभर गंगा तटों पर “हर-हर गंगे” के जयकारे गूंजते रहे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
श्रद्धालुओं ने बताया कि अमावस्या पर स्नान उनके लिए आध्यात्मिक शांति और पुण्य का अवसर होता है। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि ठंड के बावजूद गंगा स्नान की आस्था उन्हें भोर से ही घाटों की ओर खींच लाई। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि स्नान पर्व से आसपास के बाजारों में भी रौनक बढ़ी है।
दान और पूजा-अर्चना
घाटों पर श्रद्धालुओं ने साधु-संतों को उड़द दाल, चावल, कपड़े और धन का दान किया। विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ, दीपदान और गंगा स्तुति भी की गई। कई परिवारों ने गंगा तट पर विशेष अनुष्ठान और पितृ तर्पण भी किया।
डेटा / आंकड़े
- स्नान करने वाले श्रद्धालु: हजारों
- प्रमुख घाट: त्रिवेणीघाट, लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, तपोवन आदि
- स्नान शुरू होने का समय: सुबह 5 बजे
- प्रशासनिक तैनाती: सुरक्षा कर्मी, बैरिकेडिंग, लाइफ जैकेट व्यवस्था
आगे क्या?
अमावस्या का पर्व ऋषिकेश में शीतकालीन धार्मिक आयोजनों की शुरुआत माना जाता है। आने वाले दिनों में देवप्रभात पूजा, गंगा आरती और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भी श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।







