
पौड़ी जिले में भालू और गुलदार जैसे जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पाबौ, पैठणी, थलीसैंण और बीरोंखाल क्षेत्रों में भालू के हमलों ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। सोमवार को बीरोंखाल ब्लॉक के जिवई गांव में घास काटने गई एक महिला पर भालू ने हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पौड़ी जिले के कई ग्रामीण इलाकों में बीते महीनों से जंगली जानवरों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। शुरुआत में भालू मवेशियों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना रहा था, लेकिन अब इंसानों पर हमले भी सामने आने लगे हैं। इससे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे शाम ढलते ही घरों से निकलने से डरते हैं और खेती-पशुपालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
अधिकारिक जानकारी
जिवई गांव की 40 वर्षीय लक्ष्मी देवी अपने गांव की अन्य महिलाओं के साथ रोज की तरह घास काटने गई थीं। महिलाएं झाड़ियों में व्यस्त थीं, तभी अचानक झाड़ियों से एक भालू निकलकर लक्ष्मी देवी पर टूट पड़ा। हमले में महिला की दाईं आंख के पास गहरा घाव हो गया और सिर में गंभीर चोटें आईं।
साथ की महिलाओं ने शोर मचाकर मदद बुलाई, जिसके बाद भालू वहां से भाग गया। ग्रामीणों ने घायल महिला को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल पहुंचाया।
डॉ. शैलेन्द्र रावत ने बताया कि महिला की स्थिति गंभीर है और बेहतर उपचार के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने बताया कि भालू के हमलों की घटनाएं पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ी हैं और मवेशियों के बाद अब इंसान भी निशाना बन रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को गश्त बढ़ानी चाहिए और खतरे वाले इलाकों में पिंजरे लगाने चाहिए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र रावत ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि प्राथमिक राहत के रूप में 50 हजार रुपये की सहायता राशि पीड़ित परिवार को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ाने के लिए टीमों को अलर्ट कर दिया है।
आगे क्या
ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र में लगातार गश्त की जाए, पिंजरे लगाए जाएं और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। वन विभाग आने वाले दिनों में इलाके का सर्वे कर आवश्यक कार्ययोजना बनाने की तैयारी में है।





