
देहरादून: वन विकास निगम में फर्जी बिलों के जरिए सरकारी धन हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। विभागीय प्राथमिक जांच में यह साफ हो चुका है कि कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर ऐसे रेस्टोरेंट के नाम पर भुगतान लिया, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं है। अब यह प्रकरण विजिलेंस को सौंपने की तैयारी में है और सरकार ने संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह पूरा मामला हल्द्वानी स्थित वन विकास निगम कार्यालय से जुड़ा है। निगम में भोजन व्यय के नाम पर जिस रेस्टोरेंट से बिल लगाए गए थे, उसकी मौजूदगी पर शक होने पर शिकायतकर्ता ने एफिडेविट के साथ विजिलेंस को जानकारी दी। शिकायत के साथ बिल की प्रतियां और अन्य साक्ष्य भी दिए गए थे, जिनकी प्रारंभिक जांच के बाद मामला गंभीर पाया गया।
प्राथमिक जांच में क्या सामने आया
विजिलेंस के पत्र लिखने के बाद शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से तथ्यों की पुष्टि की। जांच में यह पाया गया कि हल्द्वानी शहर में उस नाम से कोई रेस्टोरेंट पंजीकृत ही नहीं है। न तो उसका लाइसेंस है और न ही भोजन निर्माण या बिक्री से संबंधित कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है।
सतर्कता अधीक्षक देहरादून की ओर से की गई प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि वन विकास निगम के कुछ अधिकारी पहले से तय योजना के तहत फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन की हेराफेरी कर रहे थे। बिल में जिन व्यंजनों का उल्लेख किया गया था, वे भी सत्यापित नहीं हुए।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट ने यह पुष्टि कर दी कि रेस्टोरेंट केवल कागज़ों में मौजूद था और उससे संबंधित पूरा बिल फर्जी और गढ़ा हुआ था।
वाउचर और दस्तावेज भी मिले संदिग्ध
जांच में रेस्टोरेंट बिल से जुड़े वाउचर, भुगतान प्रस्ताव और संलग्न दस्तावेज भी संदिग्ध पाए गए। अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर गलत दस्तावेज दाखिल किए और स्वीकृति प्रक्रिया में अनियमितताएँ बरतीं।
शासन का रुख
सरकार ने मामले पर कठोर रुख अपनाते हुए वन विभाग के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आदेश में यह भी कहा गया है कि किस अधिकारी या कर्मचारी की किस स्तर पर भूमिका रही, इसे स्पष्ट करते हुए नामों की सूची भेजी जाए।
शासन ने यह संकेत भी दिया है कि यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। जांच में प्रथम दृष्टया बीएनएस की धारा 316, 335, 336, 338, 339 और 61 के उल्लंघन के संकेत मिले हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हल्द्वानी और देहरादून दोनों क्षेत्रों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यह घटना विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। वहीं वन विभाग के कई कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि इससे भविष्य में वित्तीय प्रक्रियाएँ और अधिक पारदर्शी होंगी।
आगे की दिशा
विजिलेंस इस मामले में विस्तृत जांच तैयार कर सकता है। प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद अब वरिष्ठ अधिकारियों और वित्तीय अनुमोदन प्रक्रियाओं की गहन पड़ताल की जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निगम के कई अधिकारी और अन्य कर्मचारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।







