
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रानीपोखरी स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या आरती के स्थानांतरण पर रोक लगाते हुए उन्हें उनके वर्तमान पद पर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि प्रधानाचार्या के खिलाफ की गई शिकायतें निराधार थीं और इसके लिए जिम्मेदार शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रानीपोखरी जीजीआईसी में तैनात प्रधानाचार्या आरती के खिलाफ कुछ शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय में शिकायतें की थीं और स्थानांतरण की मांग को लेकर धरना भी दिया था। शिक्षक संघ ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया था। इसके बाद विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच कराई।
जांच में क्या सामने आया
कमेटी की रिपोर्ट में प्रधानाचार्या के खिलाफ किसी अनुचित व्यवहार की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद कमेटी ने प्रधानाचार्या और कुछ शिक्षकों के स्थानांतरण की संस्तुति की, जिसे आरती ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
आज की सुनवाई में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती कोर्ट में उपस्थित हुए। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना आधार के की गई शिकायतें स्वीकार्य नहीं हैं और इस प्रकार के कदम शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
कोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्या आरती को वर्तमान पद पर बनाए रखने और गलत शिकायत करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी कहा कि विभागीय निर्णयों में नियम और तथ्यों का पालन अनिवार्य है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
रानीपोखरी क्षेत्र के कई अभिभावकों ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। उनका कहना है कि शिकायतों के कारण विद्यालय का वातावरण खराब हो रहा था और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। कोर्ट के निर्णय से अब स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
आगे की दिशा
शिक्षा विभाग अब उन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करेगा जिन्होंने तथ्यहीन शिकायतें दर्ज की थीं। साथ ही विद्यालय में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों को शीघ्र सामान्य करने के निर्देश दिए गए हैं।






