
देहरादून: उत्तराखंड में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1.63 लाख महिलाएं अब तक ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। शनिवार को देहरादून में हुई राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति की बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल ने की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दीनदयाल अंत्योदय-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आजीविका आधारित कौशल, प्रशिक्षण और विपणन सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त कर आत्मनिर्भर बनाना है।
बैठक में साझा हुई प्रमुख जानकारी
सचिव गर्ब्याल को बताया गया कि राज्य में अब तक 68,497 स्वयं सहायता समूह, 7,768 ग्राम संगठन और 586 क्लस्टर संगठन गठित किए जा चुके हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से 5 लाख से अधिक महिलाएं आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हैं।
वर्ष 2024–25 में 1.20 लाख नई महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विभागों के समन्वय पर जोर
सचिव गर्ब्याल ने मूल्यांकन समिति में पर्यटन विभाग को शामिल करने के निर्देश दिए, ताकि होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के विपणन को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि सभी विभाग मिलकर जिलावार एकीकृत कार्ययोजना तैयार करें।
कौशल और वित्तीय सहायता को लेकर निर्देश
सचिव ने स्वयं सहायता समूहों को
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना,
- पीएमईजीपी,
- मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना
से जोड़ने पर बल दिया। इसके अलावा उत्कृष्ट उत्पादों को हाउस ऑफ हिमालयाज प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश भी दिए, ताकि राज्य के ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार मिल सके।
स्थानीय/मानवीय प्रतिक्रिया
कुछ समूह सदस्यों ने बताया कि आजीविका मिशन के माध्यम से उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी हुई है। एक स्वयं सहायता समूह की सदस्य ने कहा, “हम पहले छोटे स्तर पर काम करते थे, लेकिन अब उत्पादों की बिक्री बढ़ने से घर की आर्थिक स्थिति सुधर रही है।”
समीक्षा और आगे की कार्रवाई
सचिव गर्ब्याल ने सभी जिलों के सीडीओ और संबंधित अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट ली। जिन क्षेत्रों में प्रगति संतोषजनक नहीं रही, वहां सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।





