
ऋषिकेश: छोटे बच्चों का अचानक बीमार पड़ जाना, चिड़चिड़े होना, लगातार रोना या बिना कारण बेचैनी महसूस करना कई बार नजर दोष का संकेत माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिन बच्चों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, वे नजर के प्रभाव से अधिक प्रभावित होते हैं। बच्चों का स्वभाव सरल, कोमल और आकर्षक होने के कारण वे जल्दी ध्यान आकर्षित करते हैं, जिसके चलते उन पर नज़र बद का असर अधिक महसूस होता है।
पारंपरिक मान्यताओं में नजर दोष को दूर करने के कई प्रभावी घरेलू उपाय बताए गए हैं। इन्हें पीढ़ियों से अपनाया जाता रहा है और माना जाता है कि ये उपाय बच्चों की बेचैनी, चिड़चिड़ापन और अचानक आए असामान्य व्यवहार को शांत करते हैं।
नजर उतारने के पारंपरिक उपाय
1. तांबे के लोटे का उपाय
यदि बच्चा चिड़चिड़ापन, हल्का बुखार या अनावश्यक थकान महसूस कर रहा हो, तो तांबे के लोटे में पानी और ताजे फूल डालकर बच्चे के सिर से 7 या 11 बार उतारें। बाद में यह पानी किसी गमले या पौधे में डाल दिया जाता है। माना जाता है कि इससे नज़र का प्रभाव कम हो जाता है।
2. नमक से नजर उतारना
चुटकीभर नमक लेकर बच्चे के सिर से सात बार उतारकर उसे टॉयलेट के पानी में बहा दें। लोक मान्यता है कि इससे नजर दोष का प्रभाव समाप्त होता है।
3. सूखी मिर्च और सरसों का प्रयोग
सूखी मिर्च और सरसों के दाने लेकर बच्चे के सिर से वारने के बाद इन्हें बाहर किसी अंगारे पर जला दें। अगर जलने पर तेज गंध आए तो माना जाता है कि नजर का प्रभाव हट चुका है। गंध कम आने का अर्थ यह माना जाता है कि बच्चे पर नजर अधिक लगी थी।
4. सिंदूर का उपाय
यदि बच्चे को बार-बार नजर लगती है, तो शनिवार को किसी हनुमान मंदिर जाकर भगवान हनुमान की मूर्ति के कंधे से सिंदूर लेकर प्रतिदिन उसके माथे पर हल्के से लगाएं। माना जाता है कि इससे नजर दोष काफी हद तक कम हो जाता है।
5. फिटकरी और सरसों का उपाय
लगातार नजर लगने से बच्चे का विकास भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में फिटकरी और सरसों लेकर बच्चे के सिर से सात बार उतारें, फिर इन्हें गैस की आंच पर जला दें। मान्यता है कि इससे नजर दोष का असर समाप्त होकर बच्चे को मानसिक और शारीरिक राहत मिलती है।







