
देहरादून: उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी एक बार फिर तेज हो गई है। देहरादून में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरक सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कोई नई नहीं है। दोनों नेताओं के बीच न केवल वैचारिक मतभेद रहे हैं बल्कि चुनावी रणनीतियों और राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर भी दोनों अक्सर एक-दूसरे पर निशाना साधते रहे हैं। हाल ही में फिर से दोनों के बीच जुबानी टकराव सामने आया है।
आधिकारिक जानकारी / बयान
जब पत्रकारों ने त्रिवेंद्र सिंह रावत से पूछा कि हरक सिंह रावत दावा कर रहे हैं कि वे दोबारा भाजपा में नहीं जाएंगे लेकिन भाजपा नेताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं, इस पर त्रिवेंद्र रावत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हरक सिंह अपनी प्रकृति के अनुसार ही बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आने पर हरक सिंह कहां होंगे, यह भी देखने वाली बात है। त्रिवेंद्र ने कहा कि “थोड़ा इंतज़ार कीजिए, आगे पता चल जाएगा।”
त्रिवेंद्र के इस बयान पर हरक सिंह रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें कई चुनावों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं और उन्होंने पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। हरक ने दावा किया कि यदि उन्हें हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिलता, तो परिणाम कुछ और होते। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे ही सबकुछ हैं, जबकि जीत संगठन की मेहनत और जमीनी कार्यकर्ताओं की बदौलत मिलती है।
हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में कन्हैया कुमार, उदित राज और अन्य नेताओं के क्षेत्रों में चुनावी अभियान में सक्रिय भागीदारी की है। उन्होंने कहा कि “दिल्ली की सड़कों पर नारे लगाने से लेकर बूथ रणनीति बनाने तक मैंने हर स्तर पर काम किया है।”
इसके साथ ही हरक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा से ठीक पहले ईडी द्वारा उनकी जांच शुरू होना किसी बड़े राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत देता है। उन्होंने इसके लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
अंत में हरक सिंह रावत ने त्रिवेंद्र रावत को चुनावी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र से त्रिवेंद्र चुनाव लड़ेंगे, वे भी उसी क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि तब यह साफ हो जाएगा कि उन्होंने कितने नेताओं को चुनाव मैदान में मात दी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून में राजनीतिक चर्चाओं में दोनों नेताओं की बयानबाज़ी प्रमुख विषय बनी हुई है। स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता कहते हैं कि हरक और त्रिवेंद्र की पुरानी प्रतिद्वंदिता विधानसभा चुनाव करीब आते ही फिर उभरने लगी है। एक स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि “दोनों नेताओं के बीच यह विवाद राज्य की राजनीति को एक बार फिर गर्म कर देगा।”
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बयानबाज़ी और तेज़ हो सकती है, खासकर यदि चुनावी तैयारियां शुरू होती हैं। दोनों दलों में रणनीतिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस टकराव के राजनीतिक असर को समझते हुए अपने-अपने नेताओं की भूमिका तय कर सकते हैं।







