
ऋषिकेश: पहाड़ों में बेहद लोकप्रिय लिंगुड़ा, जिसे ‘हिमालयी फिडलहेड’ के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड की सबसे खास और पौष्टिक सब्जियों में गिना जाता है। घुमावदार आकार और अनोखे स्वाद वाली यह सब्जी सिर्फ खाने में लाजवाब नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं मानी जाती। लंबे समय से पहाड़ी परिवारों की थाली में शामिल लिंगुड़ा शरीर को ऊर्जा देने के साथ रोगों से बचाव में भी अहम भूमिका निभाता है।
स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार बताते हैं कि लिंगुड़ा पहाड़ों का छिपा हुआ पौष्टिक खज़ाना है, जो फाइबर, आयरन, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसका हल्का कुरकुरा स्वाद इसे सब्जी, अचार और सूप जैसे कई पारंपरिक व्यंजनों का हिस्सा बनाता है। बढ़ते समय में जब लोग प्राकृतिक और ऑर्गेनिक आहार की ओर लौट रहे हैं, ऐसे में लिंगुड़ा एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बन रहा है।
एनीमिया और पाचन के लिए फायदेमंद
लिंगुड़ा का सबसे बड़ा आकर्षण इसका उच्च पोषण मूल्य है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज को दूर करने में सहायक होता है। गैस या पेट फूलने की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए यह सब्जी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
आयरन की पर्याप्त मात्रा होने के कारण लिंगुड़ा शरीर में खून की कमी को पूरा करने में सहायक है और एनीमिया से राहत दिलाने में मदद करता है। वहीं विटामिन C प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, जिससे बदलते मौसम में शरीर बीमारियों से बेहतर तरीके से मुकाबला कर पाता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि लिंगुड़ा सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि पहाड़ी जीवनशैली का हिस्सा है। घरों में इसे हर मौसम में अलग-अलग रूप में पकाया जाता है और कई परिवार इसे पहाड़ों की पारंपरिक “औषधीय सब्जी” मानते हैं।







