
देहरादून/चमोली: उत्तराखंड के ऐतिहासिक गौचर मेले का शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज चमोली जिले में मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं और स्थानीय व्यापारियों की भागीदारी मुख्य आकर्षण रहेंगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गौचर मेला उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कभी यह प्रदेश का सबसे बड़ा मेला माना जाता था, जिसमें न केवल पहाड़ बल्कि देशभर से कलाकार, खिलाड़ी और व्यापारी शामिल होते थे। कृषि आधारित प्रदर्शनी और पारंपरिक उत्पाद इस मेले की पहचान रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी
प्रशासन ने मेले के दौरान गौचर बाजार और आसपास के क्षेत्र का विशेष सौंदर्यीकरण करवाया है। नगर में पार्किंग, परिवहन, साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
स्थानीय / मानवीय आवाजें
स्थानीय लोगों का कहना है कि गौचर मेला न सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह स्थानीय व्यापार और रोजगार का बड़ा अवसर भी देता है। कई व्यापारियों ने बताया कि मेले के दौरान बाहर से आने वाले कलाकार और पर्यटक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि / विशेषज्ञ दृष्टिकोण
गौचर मेले की शुरुआत चमोली और पिथौरागढ़ के भोटिया जनजातीय समुदाय की पहल पर हुई थी। जनजातीय क्षेत्र नीती-माणा घाटी के प्रमुख व्यापारी—स्वर्गीय बाल सिंह पाल, पान सिंह बमपाल और गोविंद सिंह राणा—ने इस व्यापारिक मेले का विचार उस समय के समाजसेवी व पत्रकार स्वर्गीय गोविंद सिंह नोटियाल के सामने रखा। गढ़वाल के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के सुझाव पर वर्ष 1943 में गौचर में इस मेले की शुरुआत की गई। धीरे-धीरे यह व्यापारिक आयोजन सांस्कृतिक और औद्योगिक मेले के रूप में विकसित होता गया।
बीते वर्षों में यहाँ प्रदर्शित की गई विशालकाय सब्जियाँ—विशेषकर लौकी और मूली—आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती थीं।
आंकड़े / डेटा
– मेला कुल 7 दिनों तक चलेगा।
– प्रदेश और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कलाकार, खिलाड़ी और व्यापारी आने की संभावना।
– सुरक्षा और व्यवस्था के लिए नगर क्षेत्र में विशेष टीमें तैनात।
आगे क्या
प्रशासन द्वारा मेले के सभी कार्यक्रमों की निगरानी की जाएगी। पंजीकरण, ट्रैफिक प्रबंधन और सांस्कृतिक मंचों पर दैनिक समीक्षा होगी।
आयोजकों का कहना है कि सहभागिता बढ़ाने के लिए इस वर्ष कई नई गतिविधियाँ भी शामिल की गई हैं।







