
ऋषिकेश: देवभूमि उत्तराखंड का प्रवेश द्वार और योग-ध्यान की राजधानी माने जाने वाला ऋषिकेश आज एक बड़ी समस्या से जूझ रहा है। जहां कभी गंगा की शांत धारा, घाटों का सुकून और वातावरण की पवित्रता लोगों को आध्यात्मिक शांति देती थी, वहीं अब पर्यटकों की बढ़ती भीड़, कैमरे, मोबाइल फ्लैश और रील्स कल्चर ने शहर की आत्मा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
आज ऋषिकेश में आने वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक वातावरण का सम्मान करने के बजाय सोशल मीडिया कंटेंट बनाने में अधिक दिलचस्पी दिखाता है।
बढ़ती भीड़ से स्थानीय लोग परेशान
पिछले कुछ वर्षों में ऋषिकेश व्लॉगिंग, इंस्टाग्राम रील्स और ट्रैवल कंटेंट के लिए देशभर में ट्रेंडिंग डेस्टिनेशन बन गया है। लेकिन इसकी कीमत स्थानीय लोगों को चुकानी पड़ रही है।
- शहर की संकरी गलियां लगातार जाम से भरी रहती हैं
- लक्ष्मण झूला और राम झूला क्षेत्र में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है
- घाटों पर बढ़ते शोर, भीड़ और अनुशासनहीनता ने आध्यात्मिक माहौल को बिगाड़ दिया है
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह भीड़ ऋषिकेश की पवित्रता को नुकसान पहुँचा रही है।
स्थानीयों की आवाज़: “भक्ति की जगह कैमरे ले गए”
वीरेंद्र सेमवाल ने बताया: “गंगा घाटों पर जहां पहले लोग ध्यान में लीन रहते थे, अब वहां कैमरे सेट किए जाते हैं। कुछ पर्यटक ऊंची आवाज़ में म्यूजिक चलाकर नाचते हैं, जिससे धार्मिक माहौल पूरी तरह बिगड़ जाता है। ऋषिकेश कोई पार्टी स्पॉट नहीं, यह एक तीर्थ है। यहां आने वालों को इसकी मर्यादा समझनी चाहिए।”
सुरेश सिंह ने नाराज़गी जताई: “लोग यहां गंदगी फैलाते हैं, गाड़ियां गलत तरीके से चलाते हैं, पार्किंग की परवाह नहीं करते। हर दिन ट्रैफिक जाम लगता है—न किसी को नियमों की चिंता है, न स्थानीय लोगों की परेशानी का एहसास।”
पर्यटकों ने बदल दिया शहर का स्वरूप
स्थानीयों का कहना है कि अत्यधिक भीड़ ने—
- घाटों की शांति छीनी
- आवागमन मुश्किल किया
- धार्मिक वातावरण को नुकसान पहुंचाया
- गंगा तटों की पवित्रता पर असर डाला
जो ऋषिकेश कभी योग, ध्यान और साधना का केंद्र था, अब कहीं-कहीं शोर, सेल्फी और रील्स का केन्द्र बनता जा रहा है।
ऋषिकेश का महत्व केवल पर्यटन में नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा में है। यदि यही ऊर्जा भीड़ और सोशल मीडिया के दबाव में खोने लगी, तो शहर की असली पहचान खतरे में पड़ सकती है।
आवश्यक है कि पर्यटक ऋषिकेश की पवित्रता का सम्मान करें, नियमों का पालन करें और इस तीर्थ को मनोरंजन स्थल की तरह न देखें।
ऋषिकेश केवल घूमने की जगह नहीं—यह एक अनुभव, एक साधना और एक पवित्र धरोहर है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।






