
चीला/ ऋषिकेश: राजाजी टाइगर रिजर्व में 15 नवंबर से जंगल सफारी दोबारा शुरू की जा रही है। पार्क प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और शनिवार को पूजा-अर्चना के साथ चीला एवं मोतीचूर रेंज के गेट पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे। देश-विदेश से आने वाले सैकड़ों पर्यटक अब वन्यजीवों और प्राकृतिक सुंदरता का करीब से आनंद ले सकेंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राजाजी टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जहां हर वर्ष हजारों पर्यटक हाथी, गुलदार, सांभर, चीतल और कई अन्य वन्यजीवों को देखने पहुंचते हैं। मानसून के बाद पार्क निर्धारित अवधि के लिए बंद रहता है और शीतकालीन सीजन में पुनः खोला जाता है।
जंगल सफारी की तैयारियां पूरी
मोतीचूर रेंज अधिकारी महेश सेमवाल ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
मोतीचूर रेंज में पर्यटक करीब से देख सकेंगे:
- ट्रांसलोकेट कर लाए गए टाइगर
- 600 से अधिक हाथी
- सफेद सांभर
- हिरण, चीतल
- मोर और अन्य पक्षी
उन्होंने बताया कि मोतीचूर रेंज में पर्यटकों की सुविधा के लिए एक विशेष टिकट काउंटर बनाया जा रहा है, जो जल्द पूरा होकर संचालन में आ जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजाजी पार्क के खुलने की खबर से स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों में उत्साह है। स्थानीय गाइडों और जीप संचालकों का कहना है कि सफारी शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सर्दियों के पर्यटन सीजन में बेहतर भीड़ देखने को मिलेगी।
शुल्क में नहीं हुआ बदलाव
पार्क प्रशासन ने इस वर्ष प्रवेश शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की है। मौजूदा शुल्क इस प्रकार हैं:
- भारतीय पर्यटक: ₹150
- विदेशी पर्यटक: ₹600
- भारतीय वाहन: ₹250
- विदेशी वाहन: ₹500
- छात्र: 50% छूट
- वन विश्राम भवन शुल्क: ₹1000 प्रति रात
- व्यावसायिक कैमरा शुल्क: ₹500
डग्गामार वाहनों पर प्रतिबंध
मोतीचूर रेंज में अवैध या अनरजिस्टर्ड वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल टैक्सी नंबर और रजिस्टर्ड वाहन ही पर्यटकों को सफारी करा सकेंगे। प्रशासन का उद्देश्य है कि जंगल में अनावश्यक भीड़ न बढ़े और वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
आगे क्या?
15 नवंबर से सफारी शुरू होने के बाद पार्क प्रशासन वन्यजीवों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखेगा। पर्यटकों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश भी जारी किए जाएंगे, ताकि वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।






