
देहरादून साहित्य महोत्सव (डीडीएलएफ) के सातवें संस्करण का शुभारंभ आज दून इंटरनेशनल स्कूल, सिटी कैंपस में होगा। तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में साहित्य, सिनेमा, संगीत, इतिहास और समाज जैसे विषयों पर देशभर के दिग्गज विचारक, कलाकार और लेखक चर्चा करेंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून साहित्य महोत्सव पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को नई दिशा दे रहा है। यह मंच न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, बल्कि युवाओं को पुस्तकों और रचनात्मकता से जोड़ने का प्रयास भी निरंतर करता आ रहा है।
फेस्टिवल के मुख्य आकर्षण
इस बार के फेस्टिवल की थीम है— “वसुधैव कुटुंबकम – वॉइसेस ऑफ यूनिटी”,
जिसके माध्यम से विविध विचारों, अभिव्यक्तियों और संवादों को एकता के सूत्र में पिरोने का संदेश दिया जाएगा।
फेस्टिवल में शामिल होने वाले प्रमुख नाम:
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
- जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
- अभिनेत्री नंदिता दास
- अभिनेत्री शेफाली शाह
- लेखिका शोभा डे
- अभिनेता आदिल हुसैन
- कथावाचक जया किशोरी
- संगीतकार विशाल, रेखा भारद्वाज
- गायिका उषा उथुप
इनके अलावा भी साहित्य, संगीत और कला जगत के कई महत्वपूर्ण चेहरे फेस्टिवल में उपस्थित रहेंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
दून शहर के साहित्य प्रेमियों और छात्रों में फेस्टिवल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि डीडीएलएफ जैसे आयोजनों से शहर की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है और युवाओं को रचनात्मक मंच मिलता है।
आयोजकों का बयान
डीडीएलएफ के संस्थापक सम्रांत विरमानी ने बताया कि यह फेस्टिवल 14 से 16 नवंबर तक आयोजित होगा और एक बार फिर साहित्य, सिनेमा, संगीत, भोजन, इतिहास और प्रदर्शन कला का संगम बनेगा।
उन्होंने कहा: “हम युवाओं को डिजिटल दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक संवाद और पुस्तकों की दुनिया से जोड़ना चाहते हैं।”
फेस्टिवल निदेशक सौम्या कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इस वर्ष कार्यक्रमों में इतिहास, पर्यावरण, वैश्विक संवाद, कविता, सिनेमा और व्यक्तिगत अनुभवों का समृद्ध मिश्रण देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
आगे क्या?
तीन दिवसीय डीडीएलएफ में पैनल डिस्कशन, पुस्तक विमोचन, साहित्यिक संवाद, लाइव संगीत प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों ने बताया कि प्रतिभागियों को कई इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से लेखकों, कलाकारों और विचारकों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा।







