
देहरादून: राजधानी के कौलागढ़ और सहस्रधारा रोड क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जल संस्थान द्वारा तैयार की गई दो बड़ी जल योजनाएं फिलहाल अधर में लटक गई हैं। इन योजनाओं के तहत नहरों से पंपिंग कर जलापूर्ति की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन अब सामने आया है कि प्रस्तावित नहरों में गर्मियों के दौरान पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं रहेगा। ऐसे में हजारों घरों के लिए आगामी गर्मी में पेयजल संकट गहराने का खतरा है।
अमृत योजना के तहत दो प्रमुख परियोजनाएं अधर में
जल संस्थान ने “अमृत योजना” के अंतर्गत राजधानी के दो प्रमुख इलाकों — सहस्रधारा रोड और कौलागढ़ क्षेत्र — के लिए करोड़ों रुपये की पेयजल परियोजनाएं तैयार की थीं। इनका उद्देश्य बढ़ती आबादी वाले इलाकों में लगातार जल आपूर्ति सुनिश्चित करना था। लेकिन अब व्यावहारिक स्तर पर नहरों में पानी की कमी सामने आने से ये योजनाएं संकट में हैं।
सहस्रधारा रोड की 173 करोड़ की योजना ठप
सहस्रधारा रोड क्षेत्र, विशेष रूप से मयूर विहार से पैसिफिक गोल्फ तक, निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 173 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई थी। इसमें जाखन नहर से 27 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) पानी पंप करने का प्रस्ताव था, साथ ही पैसिफिक के समीप जल उपचार संयंत्र (WTP) और 28 ओवरहेड टैंक बनाने की योजना थी।
करीब 15 हजार घरों को पाइपलाइन से जल कनेक्शन देने का अनुमान लगाया गया था। इस सर्वे और एस्टीमेट पर 15 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन जांच में पता चला कि जाखन नहर में सिर्फ 90 क्यूसेक पानी उपलब्ध है, जिसमें से एक अन्य परियोजना पहले से ही पानी ले रही है। गर्मियों में जलस्तर घटने पर पर्याप्त आपूर्ति असंभव होगी।
कौलागढ़ की 44 करोड़ की योजना भी रुकी
कौलागढ़ क्षेत्र के लगभग 5 हजार घरों के लिए 44 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई थी, जिसके तहत बीजापुर नहर से 8 एमएलडी पानी पंप करने का प्रावधान था। लेकिन बीजापुर नहर में केवल 60 क्यूसेक पानी है, जिसमें से 7 एमएलडी पानी पहले से दिलाराम चौक क्षेत्र को आपूर्ति के लिए जाता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में इस योजना से पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद नहीं है। इस योजना के सर्वे पर भी करीब 5 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया में देरी
कौलागढ़ परियोजना को शासन से बजट स्वीकृति मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया शुरू भी की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे निरस्त कर पुनः प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, सहस्रधारा रोड योजना को अब तक बजट स्वीकृति नहीं मिली, जिससे इसका भविष्य अनिश्चित है।
नहरों की संवर्धन योजना भी अस्पष्ट
सिंचाई विभाग ने जल संस्थान को नहरों से जल लेने की अनुमति इस शर्त पर दी है कि नहरों का संवर्धन (capacity enhancement) किया जाएगा। हालांकि, संवर्धन के बाद वास्तविक जल क्षमता कितनी बढ़ेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में जल संस्थान की योजनाएं तकनीकी और संसाधन दोनों स्तरों पर अधर में हैं।
अधिकारियों का दावा – प्राथमिकता पर काम जारी
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा, “नहरों में पानी की कमी नहीं है। यदि ये योजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं तो आने वाले गर्मियों में कौलागढ़ और सहस्रधारा रोड में जल संकट गहराएगा। संस्थान इस पर प्राथमिकता से काम कर रहा है।”






