
रुद्रपुर: उत्तराखंड में कांग्रेस की नई संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद उधम सिंह नगर जनपद की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस हाईकमान ने एक बार फिर हिमांशु गाबा को उधम सिंह नगर जिलाध्यक्ष और महिला कार्यकर्ता ममता रानी को रुद्रपुर शहर कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले ने पार्टी के भीतर असंतोष की लहर दौड़ा दी है।
नई नियुक्तियों के ऐलान के बाद रुद्रपुर में कांग्रेस दो धड़ों में बंटी नज़र आ रही है। एक ओर गाबा समर्थक कार्यकर्ता हाईकमान के फैसले का स्वागत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कई वरिष्ठ नेता और पार्षद इस निर्णय से नाराज हैं।
पार्षदों का इस्तीफा और आरोपों की झड़ी
रुद्रपुर नगर निगम के कई कांग्रेस पार्षदों ने सिटी क्लब में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया। पार्षदों ने कहा कि पार्टी की वर्तमान स्थिति पहले से ही कमजोर है, और ऐसे निर्णय संगठन को और कमजोर कर देंगे।
उनका कहना है कि “जब पार्टी को नए उत्साह और नेतृत्व की जरूरत थी, तब पुराने ढर्रे पर फैसले लेना समझ से परे है। तेज़-तर्रार और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देने की बजाय महिला कार्यकर्ता को शहर की कमान देना आगामी चुनावों में नुकसानदायक साबित हो सकता है।”
हाईकमान के फैसले पर दोहरी प्रतिक्रिया
जहां एक तरफ गाबा समर्थक कांग्रेसियों ने हाईकमान के निर्णय को “अनुभव और स्थिरता” का प्रतीक बताया है, वहीं असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह बदलाव केवल नाम का है — इससे संगठन में कोई नई ऊर्जा नहीं आएगी।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि पिछले चुनावों में कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर रही थी, और अब ऐसे फैसले पार्टी की जमीनी पकड़ को और भी कमजोर कर सकते हैं।
रुद्रपुर में कांग्रेस की भविष्य की राह कठिन
नगर के कई पार्षदों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे अब पार्टी के किसी भी कार्यक्रम या अभियान में हिस्सा नहीं लेंगे। इससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि रुद्रपुर में कांग्रेस को आंतरिक मतभेदों से जूझना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी समय रहते असंतोष दूर नहीं करती, तो आगामी नगर निकाय और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रुद्रपुर में कांग्रेस की नई नियुक्तियां जहां एक ओर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा सकती हैं, वहीं पार्टी के अंदरूनी असंतोष और बगावत के स्वर संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस तरह से इस नाराजगी को शांत कर पाता है और संगठन को एकजुट रख पाता है।







