
देहरादून: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास प्रस्तावित इको सेंसिटिव जोन को लेकर उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य को पत्र लिखकर कहा है कि प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव संस्थान (WII) की सिफारिशों से मेल नहीं खाता, इसलिए वर्तमान स्वरूप में इसे स्वीकृति नहीं दी जा सकती। केंद्र ने राज्य सरकार को प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर संशोधित ड्राफ्ट दोबारा भेजने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र ने प्रस्ताव को बताया अपूर्ण और असंगत
पर्यावरण मंत्रालय की वन्यजीव प्रभाग (Wildlife Division) की ओर से राज्य के प्रमुख सचिव (वन) को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि
उत्तराखंड द्वारा भेजा गया प्रस्ताव NTCA और WII की टिप्पणियों से मेल नहीं खाता।
मंत्रालय ने साफ कहा कि —
“प्रस्ताव को वर्तमान स्वरूप में स्वीकृति नहीं दी जा सकती। राज्य सरकार को इसे संशोधित कर दोबारा प्रस्तुत करना होगा।”
ग्रामीण क्षेत्रों को दी गई रियायत पर केंद्र की आपत्ति
उत्तराखंड सरकार ने अपने प्रस्ताव में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास कई ग्रामीण और रिहायशी इलाकों को इको सेंसिटिव जोन से राहत देने की कोशिश की थी। कई स्थानों पर इको जोन की सीमा 1 किलोमीटर से भी अधिक रखी गई, जबकि कुछ इलाकों में इसे काफी कम या शून्य रखा गया।
केंद्र ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि —
“ESZ की सीमा यदि 1 किलोमीटर से कम रखी जा रही है, तो इसके लिए विस्तृत औचित्य, मानचित्र और वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत किया जाए।”
WII और NTCA के सुझावों को नजरअंदाज किया गया
केंद्र ने बताया कि मंत्रालय ने राज्य द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को वन्यजीव संस्थान (WII) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के साथ साझा किया था। दोनों संस्थाओं ने महत्वपूर्ण सुझाव भेजे थे, जिनमें इको सेंसिटिव जोन की सीमाओं को लेकर संशोधन की सिफारिश की गई थी। लेकिन राज्य सरकार ने अपने 23 सितंबर 2025 के पत्र में इन बिंदुओं का आंशिक अनुपालन करते हुए भी NTCA की प्रमुख सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया।
केंद्र ने कहा — इको जोन है ‘शॉक एब्जॉर्बर’
मंत्रालय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इको सेंसिटिव जोन “संरक्षित क्षेत्रों के लिए शॉक एब्जॉर्बर (Shock Absorber)” की तरह कार्य करते हैं। इनका उद्देश्य मानवीय गतिविधियों से नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव कम करना है।
पत्र में कहा गया है —
“राज्य सरकार को प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए वैज्ञानिक औचित्य के साथ संशोधित ड्राफ्ट प्रस्तुत करना चाहिए।”
मंत्रालय का पत्र और आगे की प्रक्रिया
यह पत्र 31 अक्टूबर 2025 को मंत्रालय के वैज्ञानिक डॉ. सुधीर चिण्टलापाटी द्वारा राज्य को भेजा गया है। मंत्रालय ने कहा कि तर्कसंगत पुनरीक्षण के बाद ही प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
इस बीच, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने बताया कि —
“केंद्र ने कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार के लिए कहा है। विभाग जल्द ही औचित्य सहित संशोधित प्रस्ताव केंद्र को भेजेगा।”
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व एशिया के सबसे पुराने टाइगर रिजर्व में से एक है और यहां हर साल हजारों पर्यटक आते हैं। इको सेंसिटिव जोन (ESZ) का उद्देश्य रिजर्व के चारों ओर संतुलित पर्यावरणीय गतिविधियों और बफर जोन का निर्माण करना है। यह निर्णय वन्यजीवों की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।





