
देहरादून: शहरवासियों को सड़कों पर घूमते और हमला करने वाले स्ट्रीट डॉग्स से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद देहरादून नगर निगम ने राज्य का पहला डॉग शेल्टर सेंटर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नई नीति के तहत आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखकर उनका व्यवहार सुधार किया जाएगा, वहीं सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खिलाने वालों पर भी कार्रवाई होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ वर्षों में देहरादून सहित उत्तराखंड के कई शहरों में स्ट्रीट डॉग्स के हमलों के मामले लगातार बढ़े हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर हमले के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली थी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को एक आदेश जारी कर सभी राज्यों और नगर निकायों को सड़कों व राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए। इसी क्रम में नगर निगम देहरादून ने नई पहल शुरू की है।
नगर निगम की योजना
देहरादून नगर निगम ने शंकरपुर क्षेत्र में एक बड़े डॉग शेल्टर सेंटर के निर्माण की योजना तैयार की है। इसकी क्षमता मौजूदा एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर से कई गुना अधिक होगी। वर्तमान में जहां केवल 72 कुत्तों को रखने की सुविधा है, वहीं नए शेल्टर में यह संख्या 150 से 200 से अधिक करने की योजना है।
अपर सचिव संतोष बडोनी की ओर से इस संबंध में सभी नगर निकायों को निर्देश जारी किए गए हैं। शासन से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
डॉग्स की जांच और व्यवहार सुधार नीति
नगर निगम की विशेष समिति प्रत्येक कुत्ते के व्यवहार की जांच करेगी। केवल उन्हीं डॉग्स को शेल्टर भेजा जाएगा जो आक्रामक या हमलावर प्रवृत्ति के पाए जाएंगे। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि शेल्टर में कुत्तों को तब तक रखा जाएगा जब तक उनका व्यवहार सामान्य न हो जाए। इस प्रक्रिया में चिकित्सा, प्रशिक्षण और निगरानी तीनों चरण शामिल होंगे।
पशु प्रेमियों के लिए गोद लेने की सुविधा
नई नीति में यह प्रावधान भी है कि पशु प्रेमी नागरिक इन कुत्तों को गोद ले सकते हैं। इसके लिए संबंधित नगर निकाय में आवेदन देना होगा। गोद लेने के बाद कुत्ते को चिन्हित कर आधिकारिक अनुमति दी जाएगी, लेकिन एक बार गोद लेने के बाद उसका परित्याग नहीं किया जा सकेगा।
खिलाने वालों पर जिम्मेदारी तय
नगर निगम ने सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने वालों के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं। यदि ऐसे कुत्ते किसी व्यक्ति पर हमला करते हैं तो खिलाने वाले को कुत्ते का मालिक माना जाएगा और उस पर 1,000 से 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
शिकायत प्रकोष्ठ और जनजागरूकता
नगर निगम जल्द एक डॉग शिकायत प्रकोष्ठ बनाने जा रहा है। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा ताकि नागरिक किसी भी घटना या शिकायत की सूचना तुरंत दे सकें। साथ ही शहरभर में पोस्टर, बैनर और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को जिम्मेदार पालतू और स्ट्रीट डॉग व्यवहार के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
आंकड़े और प्रगति
नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से अब तक 54,000 कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण किया जा चुका है। अभी लगभग 20% कुत्तों की नसबंदी बाकी है। अधिकारियों का मानना है कि नए शेल्टर और नीति के लागू होने से स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी समस्याओं में काफी कमी आएगी।
स्थानीय दृष्टिकोण
स्थानीय निवासी राजेश थापा का कहना है, “सड़क पर बढ़ते डॉग हमलों से बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा डर में हैं। यदि शेल्टर सेंटर बनता है तो लोगों को राहत मिलेगी।”
वहीं, पशु प्रेमी मीनाक्षी जोशी ने कहा, “शहर के कुत्तों को शेल्टर देना अच्छा कदम है, लेकिन उनके लिए दयालु और जिम्मेदार गोद लेने की प्रक्रिया जरूरी है।”
आगे की दिशा
शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब नगर निगम शंकरपुर में निर्माण कार्य शुरू करेगा। उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में यह शेल्टर पूरी तरह से कार्यरत हो जाएगा। फिलहाल निगम जनजागरूकता और कुत्तों की पहचान प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।




