
देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग और एसटीएफ इन दिनों हाथी दांत बरामदगी के एक रहस्यमय मामले की तहकीकात में जुटे हैं। हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र में एक व्यक्ति के पास से बरामद हुए 22 इंच लंबे और तीन किलो वजनी हाथी दांत ने वन्यजीव अपराध के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। विभाग अब न केवल दूसरे गायब दांत की तलाश में है, बल्कि संभावित तस्करी गिरोह के सुराग भी तलाश रहा है।
कैसे खुला हाथी दांत बरामदगी का रहस्य
बीते सप्ताह वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की सूचना पर एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने हरिद्वार के बुग्गावाला इलाके में छापेमारी की थी। इस दौरान आरोपी गुलाम हसन उर्फ शमशेर को पकड़ा गया, जिसके पास से 22 इंच लंबा, 9 इंच मोटा और करीब 3 किलो वजनी हाथी दांत बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में यह दांत करीब 10–15 साल पुराना बताया गया है।
गुलाम हसन ने पूछताछ में दावा किया कि उसे यह दांत राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों में पहले से मृत एक हाथी के शव से मिला था। हालांकि विभाग उसकी इस कहानी पर संदेह जता रहा है।
वन विभाग ने शुरू की गहराई से जांच
राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने अब पिछले 15 वर्षों के सभी हाथियों की मृत्यु के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या किसी हाथी के दांत गायब पाए गए थे या क्या कोई रिपोर्ट छिपाई गई थी।
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे ने कहा —
“अगर गुलाम का दावा सही है, तो हमें यह जानना होगा कि विभाग को उस वक्त कैसे भनक नहीं लगी और दूसरा दांत कहाँ गया। हम सभी पुराने फाइल रिकॉर्ड और मृत्यु रिपोर्ट की समीक्षा कर रहे हैं।”
संगठित तस्करी नेटवर्क की आशंका
वन विभाग को शक है कि यह मामला सिर्फ एक ‘मिले हुए दांत’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हाथी दांत तस्करी के संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जो राजाजी से लेकर हरिद्वार और उससे आगे तक फैला है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इतने सालों तक दांत को छिपाकर रखना इस बात का संकेत है कि यह या तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री के लिए तैयार किया जा रहा था, या फिर यह पुराने वाइल्डलाइफ क्राइम नेटवर्क की कोई बची हुई कड़ी है।
आरोपी की कस्टडी रिमांड मांगेगा विभाग
हरिद्वार डीएफओ स्वप्निल ने बताया —
“हम आरोपी गुलाम हसन की कस्टडी रिमांड के लिए जल्द कोर्ट में आवेदन देंगे। उससे पूछताछ में दूसरे दांत का पता और तस्करी गिरोह से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा कि फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है, लेकिन वन विभाग और एसटीएफ दोनों अब इसे राज्यव्यापी वन्यजीव तस्करी की चेन के रूप में देख रहे हैं।
बड़ा सवाल — कहां गया दूसरा दांत?
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर गुलाम का दावा सही है और यह दांत किसी मृत हाथी के शव से मिला था, तो दूसरा दांत कहाँ गया और उस समय विभाग को इस घटना की जानकारी क्यों नहीं मिली?
इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि क्या किसी स्थानीय शिकारी या व्यापारी ने इस दांत को राजाजी टाइगर रिजर्व से बाहर तस्करी के जरिए निकाला था।






