
गुलरभोज। गुलरभोज-लालकुंआ रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आया घायल हाथी अब भी तड़प रहा है। मथुरा से बुलाई गई विशेष वन्यजीव टीम लगातार उपचार में जुटी हुई है। घटना के बाद भी रेलवे प्रशासन ने किसी विभागीय जांच से इंकार किया है, जबकि पशु प्रेमियों ने रेलवे की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण बताया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
शनिवार को गुलरभोज क्षेत्र में रेलवे के पोल संख्या 16/8 के पास पीपल पड़ाव रेंज में ट्रेन की चपेट में आने से एक हाथी गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना ने फिर से रेलवे और वन्यजीव सुरक्षा के बीच समन्वय की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी इस ट्रैक पर कई बार जंगली जानवरों के घायल या मारे जाने की घटनाएं हो चुकी हैं।
आधिकारिक जानकारी
रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक संजीव शर्मा ने बताया कि, “वन क्षेत्र में रेल मार्ग के दोनों ओर चेतावनी और सावधानी के बोर्ड लगाए गए हैं। यह घटना हाथी के अचानक ट्रेन के सामने आने के कारण हुई। ऐसे हादसों को रोकने के लिए वन विभाग के साथ समय-समय पर समन्वय स्थापित किया जाता है।”
हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने किसी विभागीय जांच की घोषणा नहीं की है।
स्थानीय / जन प्रतिक्रियाएँ
स्थानीय लोगों और पशुप्रेमियों में रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी है। गुलरभोज के एक ग्रामीण ने कहा, “रेलवे की गति पर कोई नियंत्रण नहीं है। यदि स्पीड लिमिट का पालन होता तो हाथी की जान बचाई जा सकती थी।”
पशु संरक्षण से जुड़े संगठनों ने कहा कि रेलवे की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण यह हादसा हुआ है। उन्होंने वन क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपाय और हादसे की प्रभावी जांच की मांग की है।
संख्या / आँकड़े
रेलवे ट्रैक के इस हिस्से में 30 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा निर्धारित है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेन इससे कहीं अधिक गति से गुजर रही थी। इस ट्रैक से रोजाना 10 से अधिक मालगाड़ियां और विशेष ट्रेनें गुजरती हैं, जिनके दौरान वन्यजीवों पर खतरा बना रहता है।
आगे क्या होगा
वन विभाग की टीम मथुरा से आए विशेषज्ञों की मदद से घायल हाथी का उपचार कर रही है। फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। पशु प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि रेलवे ने जांच नहीं कराई तो वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
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