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मसूरी: लखवाड़ बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा। जौनपुर-जौनसार क्षेत्र के करीब 32 गांवों के काश्तकारों और स्थानीय लोगों ने संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एलएनटी कंपनी और प्रशासन पर अधिकारों की अनदेखी व शोषण के आरोप लगाए।
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय नेता मौजूद रहे। आंदोलन का नेतृत्व महिपाल सिंह सजवाण और जयपाल सिंह राणा सहित संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना के तहत दो गांव पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं, लेकिन आज तक कई किसानों को भूमि और फसलों का मुआवजा नहीं मिला है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि परियोजना में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय युवाओं को देने का वादा किया गया था, लेकिन केवल 4 प्रतिशत को ही नौकरी दी गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले 12 कर्मचारियों को बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। इनमें से एक युवक ने मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने एलएनटी कंपनी पर आरोप लगाया कि वह स्थानीय लोगों को नजरअंदाज कर बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने प्रशासन से अपनी 22 सूत्रीय मांगें तत्काल पूरी करने की अपील की और चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग बंद करने और चारधाम यात्रा बाधित करने तक की कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि भाजपा सरकार ने इस मुद्दे को नजरअंदाज किया, तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पवार ने कहा कि परियोजना के तहत स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने स्थानीय विधायकों प्रीतम सिंह, खजान सिंह और मुन्ना सिंह चौहान से आग्रह किया कि वे विधानसभा सत्र में इस विषय को उठाएं।
प्रशासन और कंपनी का पक्ष
एसडीएम धनौल्टी मनजू राजपूत ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की और संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर 22 मांगों पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुछ मांगों पर सहमति बन चुकी है, जबकि शेष बिंदुओं की समीक्षा जिला प्रशासन स्तर पर की जाएगी।
वहीं, एलएनटी कंपनी के डीजीएम (योजना) जितेंद्र भाटिया ने कहा कि कंपनी स्थानीय हितों का पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने बताया कि 12 कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा कानूनी सलाहकार के माध्यम से की जा रही है, ताकि निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके।





