
पिथौरागढ़। सरकार भले ही राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर उन वादों की पोल खोल देती है। इसका ताज़ा उदाहरण सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की गंगोलीहाट तहसील के प्राथमिक विद्यालय अनरगांव में देखने को मिला है, जहाँ बच्चे आज भी स्कूल भवन के बजाय किराए की दुकान में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
दो साल पहले आपदा में जमींदोज हुआ स्कूल भवन
करीब दो वर्ष पहले आई आपदा में विद्यालय का भवन रातों-रात धराशायी हो गया था। सौभाग्य रहा कि हादसा दिन के समय नहीं हुआ, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने समय बाद भी नए विद्यालय भवन के निर्माण की पहल तक नहीं हुई।
आपदा के बाद बच्चों को कई हफ्तों तक घरों में रहना पड़ा। आखिरकार गांव के लोगों ने खुद आगे बढ़कर समाधान निकाला।
ग्राम निवासी श्याम सिंह ने अपनी दुकान निःशुल्क विद्यालय संचालन के लिए उपलब्ध करा दी — और तब से यह प्राथमिक विद्यालय एक छोटे से दुकान-कक्ष में चल रहा है।
एक कमरा, पाँच कक्षाएँ, सात विद्यार्थी
वर्तमान में इस विद्यालय में पाँच कक्षाओं के सात विद्यार्थी एक ही कमरे में पढ़ते हैं। एक कोने में शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर बच्चों को पढ़ाते हैं, जबकि दूसरे कोने में भोजन माता मिड-डे मील तैयार करती हैं। न किताबों के रखने की जगह है, न खेल का मैदान — फिर भी बच्चे किसी तरह अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।
स्थानीय प्रतिनिधि और अभिभावकों ने जताई नाराजगी
बीडीसी सदस्य प्रियंका देवी ने शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा —
“दुकान के एक कमरे में विद्यार्थी कैसे पढ़ सकते हैं? शिक्षा विभाग को इसका जवाब देना होगा। स्कूल सुधार की बातें सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं, जो बेहद चिंताजनक है।”
वहीं, अभिभावक भागीरथी देवी ने कहा —
“यदि दुकान में चल रही यह कक्षाएं भी बंद हो गईं, तो छोटे बच्चों को चार किलोमीटर दूर दूसरे विद्यालय तक जाना पड़ेगा। यह उनके लिए संभव नहीं है। सरकार को जल्द कदम उठाना चाहिए।”
एक अन्य अभिभावक मंजू देवी ने चेतावनी दी —
“मामले को कई बार विभाग के संज्ञान में लाया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो गांववाले आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”
शिक्षा विभाग ने दी सफाई और आश्वासन
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तरुण पंत ने कहा —
“प्राथमिक विद्यालय अनरगांव के नए भवन के लिए बजट का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।”
हकीकत: शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ एक गांव या एक स्कूल का नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि आपदा के बाद शिक्षा व्यवस्था कितनी असुरक्षित और उपेक्षित रह गई है। दुकान में पढ़ते बच्चे और खंडहर बना स्कूल भवन सरकार के दावों को आईना दिखा रहे हैं।






