
देहरादून: राजधानी देहरादून का शीशमबाड़ा इलाका वो जगह है, जहां शहर का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगा है। कभी यहां कूड़ा निस्तारण की उम्मीद थी, लेकिन अब यह जगह कचरे के पहाड़ में बदल चुकी है। इस वजह से आसपास के लोगों का रहना दूभर हो गया है। अब नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए नई योजना तैयार की है।
राजधानी से हर दिन 400 से 500 टन कूड़ा शीशमबाड़ा वेस्ट प्लांट में पहुंचता है। साल 2017 में यह प्लांट रैमकी ग्रुप द्वारा बनाया गया था, जिसने 2018 से 2022 तक संचालन किया। इस अवधि में यहां करीब 5 से 6 लाख टन कचरा जमा हो गया, जिसके बाद नगर निगम ने यह जिम्मेदारी NACOF कंपनी को सौंप दी।
नई कंपनी ने यहां एक आधुनिक मशीन लगाई है, जो कचरे को अलग-अलग प्रक्रिया से 30 टन जैविक खाद में बदलती है। बाकी वेस्ट से निकलता है RDF (Refuse Derived Fuel) — यानी प्लास्टिक और जले हुए कचरे का मिश्रण, जो अब करीब 5 लाख टन के पहाड़ के रूप में जमा है। इससे धुएं, बदबू और आग की आशंका लगातार बनी रहती है।
इसी को देखते हुए नगर निगम ने RDF निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हर दिन 500 टन से अधिक RDF राजस्थान और मुजफ्फरनगर की सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है, जहां इसे ईंधन के रूप में उपयोग किया जाएगा।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना के अनुसार, “2017 से RDF का निस्तारण नहीं हुआ था, लेकिन अब नियमित निकासी शुरू हो चुकी है और अगले 10 महीनों में शीशमबाड़ा का RDF पहाड़ खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।”
साल 2017 में शुरू हुआ शीशमबाड़ा वेस्ट प्लांट तकनीकी खामियों और स्थानीय विरोध के कारण चर्चा में रहा। अब नगर निगम का दावा है कि RDF निस्तारण से देहरादून को कूड़े के पहाड़ से राहत मिलेगी, हालांकि बड़ी चुनौती यह है कि आने वाले सालों में ऐसे हालात दोबारा न बनें।





