
जौनसार: 20 अक्टूबर 2025 को देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र में खत पट्टी दसऊ पशगांव के छत्रधारी चालदा महासू महाराज मंदिर में पांच दिवसीय दीपावली का भव्य आगाज हुआ। खत पट्टी दसऊ के 15 गांवों के लोग भिमल की पतली लकड़ियों से बनी मशालें (होले) जलाकर ढोल-दमाऊ की थाप पर नाचते-गाते मंदिर परिसर पहुंचे। लोक गीतों और चालदा महाराज के जयकारों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
चालदा महासू: चलायमान देवता
छत्रधारी चालदा महासू महाराज जौनसार बावर के आराध्य देवता हैं, जो एक से दो वर्ष तक एक स्थान पर विराजमान रहते हैं। दसऊ पशगांव में पिछले दो वर्षों से विराजित चालदा महाराज की यह अंतिम दीपावली है। इसके बाद वे हिमाचल प्रदेश के पश्मी के लिए प्रस्थान करेंगे। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बूढ़ी दीपावली: पर्यावरण अनुकूल उत्सव
जौनसार बावर में दीपावली के एक महीने बाद बूढ़ी दीपावली मनाई जाती है, जो पर्यावरण अनुकूल होती है। इसमें बम और पटाखों का उपयोग नहीं होता। चिवड़ा और अखरोट का विशेष महत्व है। नौकरीपेशा लोग छुट्टियां लेकर गांव लौटते हैं और लोक गीतों के साथ पंचायती आंगन गुलजार करते हैं।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
यह उत्सव जौनसार बावर की सांस्कृतिक धरोहर को संजोता है। बूढ़ी दीपावली का पर्यावरण अनुकूल स्वरूप इसे आधुनिक समय में प्रासंगिक बनाता है।
स्थानीय निवासी ने कहा, “चालदा महासू की दीपावली और बूढ़ी दीपावली हमारी संस्कृति का गौरव हैं। यह उत्सव हमें एकजुट करता है।”







