
चमोली: उत्तराखंड के चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज, शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान करीब 500 श्रद्धालु मौजूद रहे। भगवान रुद्रनाथ की डोली उसी दिन गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंच गई, जहां अगले छह महीनों तक भगवान विराजमान रहेंगे। कपाट बंद होने की प्रक्रिया के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की गई, और डोली के रास्ते में नए अनाज का भोग लगाया गया। यह आयोजन उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया
रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी सुनील तिवारी ने बताया कि सुबह 4 बजे से भगवान रुद्रनाथ की विशेष पूजा शुरू हुई। सभी पारंपरिक पूजाएं पूरी करने के बाद सुबह 6 बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसके बाद 7:30 बजे भगवान की डोली रुद्रनाथ से रवाना हुई। डोली ने पंच गंगा, पितृधार, पनार गुग्याल, और मोली बुग्याल होते हुए सगर गांव की यात्रा की।
मोली बुग्याल और सगर गांव में भगवान को नए अनाज का राजभोग लगाया गया। सूर्यास्त से पहले डोली गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंची, जहां फिर से नए अनाज का भोग लगाया गया। अगले छह महीनों तक भगवान रुद्रनाथ की डोली गोपीनाथ मंदिर परिसर में रहेगी।
मंदार के फूलों की परंपरा
पुजारी सुनील तिवारी ने बताया कि कपाट बंद होने के दौरान भगवान रुद्रनाथ को मंदार (बुखला) के 251 पुष्प गुच्छों से ढका गया। ये फूल हिमालयी क्षेत्र में पाए जाते हैं और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अगले साल जब मंदिर के कपाट खुलेंगे, तो इन फूलों को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। यह परंपरा रुद्रनाथ मंदिर की विशेषता है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है।
रुद्रनाथ मंदिर का महत्व
रुद्रनाथ मंदिर, चमोली जिले में पंच केदारों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर समुद्र तल से 3,559 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हिमालय की गोद में बसा है। हर साल गर्मियों में मंदिर के कपाट खुलते हैं, और शीतकाल में इन्हें बंद कर डोली को गोपेश्वर लाया जाता है। 2024 की तीर्थयात्रा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल रुद्रनाथ मंदिर में 50,000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
स्थानीय और धार्मिक महत्व
रुद्रनाथ मंदिर की कपाट बंदी की प्रक्रिया उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं का अहम हिस्सा है। पंच केदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, और कल्पेश्वर) उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों में विशेष स्थान रखते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है।
गोपेश्वर के निवासी रमेश नेगी ने कहा, “रुद्रनाथ की डोली का गोपीनाथ मंदिर में आना हमारे लिए गर्व की बात है। यह हमारी आस्था और परंपरा का हिस्सा है।” श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन में उत्साह से भाग लिया और भगवान रुद्रनाथ के दर्शन किए।







