
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद गहरा गया है। मंगलवार को भाजपा पार्षदों और स्थानीय निवासियों ने ईसी रोड स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग ने बिना उपभोक्ताओं की सहमति के जबरन स्मार्ट मीटर लगाए, जिसके बाद बिजली बिल चार गुना तक बढ़ गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिलों में सुधार और पुराने मीटरों की जांच नहीं की गई, तो वे स्मार्ट मीटर निकालकर कार्यालय के बाहर धरना देंगे।
प्रदर्शन और आरोप
पार्षद मीनाक्षी नौटियाल के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। ज्ञापन में कहा गया कि जुलाई और अगस्त 2025 में उनके वार्ड में बिना पूर्व सूचना और उपभोक्ताओं की सहमति के स्मार्ट मीटर लगाए गए। उस समय विभाग को चेतावनी दी गई थी कि इन मीटरों में गड़बड़ी की आशंका है।
- बिल में वृद्धि: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जहां पहले दो महीने का बिजली बिल 1000-1200 रुपये आता था, वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद एक महीने का बिल 1500-2000 रुपये तक पहुंच गया है।
- जबरन स्थापना: क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों ने जबरन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए और विरोध करने वालों की नहीं सुनी।
- अपारदर्शिता: पूरे देहरादून में केवल कुछ क्षेत्रों में ही स्मार्ट मीटर लगाए गए, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
पुराने बिलों का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने शिकायत की कि पिछले आठ महीनों से पुराने मीटरों के बिल जारी नहीं किए गए। अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद एक साथ भारी राशि के बिल भेजे जा रहे हैं, जो आम उपभोक्ताओं के लिए चुकाना मुश्किल है।
मांगें और चेतावनी
पार्षदों और क्षेत्रवासियों ने दो प्रमुख मांगें रखीं:
- सभी स्मार्ट मीटरों के साथ चेक मीटर लगाकर बिजली खपत की जांच की जाए।
- जांच पूरी होने तक स्मार्ट मीटर के बिलों का भुगतान निलंबित किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिजली विभाग ने जल्द समस्या का समाधान नहीं किया, तो वे स्मार्ट मीटर निकालकर अधिशासी अभियंता कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।
जनहित में समाधान जरूरी
स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ता विवाद देहरादून में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। त्योहारी सीजन में बढ़े बिलों ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विभाग पारदर्शी जांच करे और उपभोक्ताओं का भरोसा जीते। प्रशासन और बिजली विभाग से अपेक्षा है कि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान किया जाए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।





