
हरिद्वार: दीपावली पर्व के मद्देनजर राजाजी टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट घोषित है, लेकिन इसके बावजूद लकड़ी तस्कर खुलेआम जंगल में घुसकर कीमती पेड़ों को काट रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, चीला और हरिद्वार रेंज के अंतर्गत बरसात के दौरान गंगा नदी के जरिए बहकर आए पेड़ों को आरी से काटकर उनकी डाट बनाई गई और गंगा के रास्ते भीमगौड़ा बैराज (हरिद्वार) तक पहुंचाया गया। वहां से लकड़ी को ठिकाने लगा दिया गया। काटे गए पेड़ों की संख्या एक दर्जन से अधिक बताई जा रही है।
तस्करी का तरीका
हर साल बरसात के दौरान बाढ़ के कारण पहाड़ी क्षेत्रों से भारी मात्रा में पेड़ बहकर राजाजी टाइगर रिजर्व तक पहुंचते हैं। ये पेड़ अब तस्करों के निशाने पर हैं। तस्कर इन पेड़ों को काटकर डाट बनाते हैं और गंगा नदी के जरिए भीमगौड़ा बैराज तक ले जाते हैं। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीन है और प्रशासनिक रूप से हरिद्वार, पौड़ी, और देहरादून जिलों का मिलान क्षेत्र है। इस वजह से पुलिस एक-दूसरे के क्षेत्र का हवाला देकर कार्रवाई से बचती है।
गश्त पर सवाल
राजाजी टाइगर रिजर्व में बिना अनुमति प्रवेश करना अपराध है, लेकिन इसके बावजूद तस्कर खुलेआम कीमती पेड़ काट रहे हैं। यह स्थिति या तो वन कर्मचारियों की मिलीभगत या क्षेत्र में गश्त की कमी को दर्शाती है। पार्क निदेशक डॉ. कोको रोसे ने कहा, “हम इस मामले की गहन जांच कराएंगे और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”
त्रि-रेंज मिलान क्षेत्र की चुनौती
पेड़ों की कटाई जिस क्षेत्र में हो रही है, वह मोतीचूर, चीला, और हरिद्वार रेंज का मिलान क्षेत्र है। इस क्षेत्र की जटिल प्रशासनिक सीमाएं तस्करों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं। गंगा के रास्ते पेड़ों की डाट को भीमगौड़ा बैराज तक ले जाना और वहां से बेचना तस्करों की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
संरक्षण पर खतरा
यह घटना राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की गंभीरता को उजागर करती है। दीपावली के दौरान हाई अलर्ट के बावजूद तस्करी की घटनाएं वन विभाग की निगरानी और समन्वय की कमी को दर्शाती हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से अपेक्षा है कि इस मामले की त्वरित जांच हो और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ऐसी घटनाओं को रोका जाए।






