
ऋषिकेश: उत्तराखंड की तीर्थ नगरी ऋषिकेश में नगर निगम के तहत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहनों में काम करने वाले ड्राइवरों और हेल्परों ने ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने ठेकेदार पर कम वेतन, पीएफ जमा न करने, बदसलूकी, और धमकी देने का आरोप लगाया है। करीब 80 से अधिक कर्मचारियों ने ठेकेदार की मनमानी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और व्यवस्था में सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
कर्मचारियों की शिकायतें: 8 साल से नहीं बढ़ा वेतन
कर्मचारी कल्याण सिंह नेगी ने बताया कि नगर निगम के डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहनों में काम करने वाले ड्राइवर और हेल्पर पिछले 8 साल से वेतन वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, उनके प्रोविडेंट फंड (पीएफ) का पैसा भी ठेकेदार द्वारा जमा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने ठेकेदार के मैनेजर पर बदसलूकी और धमकी देने का भी आरोप लगाया। नेगी ने कहा, “जब हम मैनेजर के रवैये का विरोध करते हैं, तो वह हमें धमकाता है। हमारी मजबूरी है, घर चलाना मुश्किल हो गया है।”
सबसे गंभीर आरोप में कर्मचारियों ने दावा किया कि ठेकेदार ने उन्हें धमकी दी कि “जो लोग आंदोलन करते हैं, उन्हें काटकर मगरमच्छ वाले तालाब में फेंक दिया जाता है।” इन शिकायतों को लेकर कर्मचारियों ने बुधवार, 15 अक्टूबर को नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपनी पीड़ा जाहिर की।
ठेकेदार मैनेजर का जवाब
कंपनी के मैनेजर ओशो दीप सिंह ने कर्मचारियों के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “कुछ लोग काम नहीं करना चाहते और बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। मैंने किसी को धमकी नहीं दी।” मैनेजर ने दावा किया कि उनकी ओर से कर्मचारियों के साथ कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया गया है।
नगर निगम का रुख
ऋषिकेश नगर आयुक्त ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कर्मचारियों की शिकायत उनके संज्ञान में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा। नगर आयुक्त ने कहा, “हम कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं और उचित कार्रवाई करेंगे।”
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की स्थिति
ऋषिकेश में स्वच्छता अभियान के तहत डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन वाहन शहर में घर-घर से कचरा एकत्रित करते हैं। यह सेवा नगर निगम द्वारा ठेकेदारों को आउटसोर्स की गई है, जिसमें ड्राइवर और हेल्पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार की मनमानी के कारण उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
कर्मचारियों की मांग और भविष्य
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें- जैसे वेतन वृद्धि, पीएफ जमा करना, और ठेकेदार की मनमानी पर रोक- पूरी नहीं हुईं, तो वे बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। यह प्रदर्शन स्वच्छता सेवाओं में लगे कर्मचारियों की समस्याओं को उजागर करता है और नगर निगम प्रशासन के लिए एक चुनौती है। उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जांच और समाधान होगा, ताकि कर्मचारियों को उनका हक मिल सके।





