
देहरादून: उत्तराखंड में अनाज एटीएम की शुरूआत ने राशन वितरण प्रणाली को क्रांतिकारी बदलाव दिया है। पहले घटतौली, कम राशन, और लंबी कतारों की शिकायतें आम थीं, लेकिन अब 21 अनाज एटीएम के जरिए पारदर्शिता, सटीक तौल, और सुविधा बढ़ी है। यह पायलट प्रोजेक्ट संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के सहयोग से शुरू किया गया, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार ने 50-50% वित्तीय योगदान दिया। हालांकि, तकनीकी रखरखाव और डिजिटल साक्षरता जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
अनाज एटीएम: एक नया दौर
पहले राशन की दुकानों पर घटतौली और गड़बड़ी की शिकायतें आम थीं। कुछ उदाहरण:
- 2022, अल्मोड़ा: सोमेश्वर में स्थानीय लोगों ने कम राशन वितरण की शिकायत की।
- पिथौरागढ़: गंगोलीहाट में पुराने कांटे के इस्तेमाल से तौल में गड़बड़ी।
- उधम सिंह नगर: फर्जी कार्ड और वितरण में अनियमितता के आरोप।
अनाज एटीएम ने इन समस्याओं को खत्म कर दिया। उत्तराखंड में 21 अनाज एटीएम विभिन्न जिलों में स्थापित किए गए हैं, जो डिजिटल रिकॉर्ड, सटीक तौल, और भीड़ नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं।
अनाज एटीएम के लाभ
- पारदर्शिता: हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड, जिससे गड़बड़ी की संभावना खत्म।
- घटतौली पर रोक: मशीन से तय मात्रा में राशन मिलता है, तौल में त्रुटि नहीं।
- भीड़ नियंत्रण: लंबी कतारों की समस्या खत्म, लाभार्थी अपनी सुविधा से राशन ले सकते हैं।
- सुविधा: कार्डधारकों को राशन लेने में आसानी।
अपर आयुक्त, खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग, पीएस पांगती ने कहा:
“अनाज एटीएम ने वितरण प्रणाली में भरोसा बढ़ाया है। यह पारदर्शिता और सुविधा का प्रतीक है।”
चुनौतियां
- तकनीकी रखरखाव: मशीनों को नियमित सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत।
- डिजिटल साक्षरता: कई राशन डीलरों को मशीन चलाने में कठिनाई, सहायक कर्मियों की जरूरत।
- आधार/राशन कार्ड त्रुटियां: तकनीकी गड़बड़ियां बाधा बनती हैं।
- बिजली बिल: डीलरों को प्रति माह करीब 800 रुपये का बिजली बिल देना पड़ता है।
- लाभांश की कमी: एटीएम संचालित करने वाले डीलरों को एक साल से लाभांश नहीं मिला।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
- विश्वास में वृद्धि: अनाज एटीएम ने राशन वितरण में पारदर्शिता लाकर उपभोक्ताओं का भरोसा जीता।
- तकनीकी नवाचार: यह प्रोजेक्ट तकनीक के उपयोग से प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है।
- जागरूकता की जरूरत: डीलरों और उपभोक्ताओं को डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता।





