
हरिद्वार: हरिद्वार के पिरान कलियर में 10 अक्टूबर को हुई बच्चा चोरी की घटना का पुलिस ने 72 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। 3 माह के शिशु को सकुशल छुड़ाकर माता-पिता को सौंप दिया गया और 6 आरोपियों, जिनमें एक दिव्यांग और चार महिलाएं शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया। यह मामला पिरान कलियर दरगाह शरीफ में जियारत के दौरान हुआ, जहां एक संगठित गिरोह ने बच्चे को चुराकर 4 लाख 90 हजार रुपये में बेच दिया। पुलिस ने मेरठ तक पीछा कर इस बच्चा चोरी की चेन का पर्दाफाश किया।
घटना का विवरण: बच्चा चोरी की साजिश
11 अक्टूबर को अमरोहा (उत्तर प्रदेश) के ज्योतिबा फुले नगर निवासी जहीर अंसारी ने पिरान कलियर पुलिस को तहरीर दी कि वे अपनी पत्नी और तीन माह के बेटे के साथ पिरान कलियर दरगाह शरीफ जियारत के लिए आए थे। 10 अक्टूबर की रात वे एक दुकान के पास रुके थे। देर रात दो अज्ञात महिलाएं उनके पास आईं और छेड़छाड़ की शिकायत करते हुए वहां रुक गईं।
महिलाओं ने दंपति से जान-पहचान बढ़ाई। एक महिला ने जहीर को चाय पिलाने के बहाने दूर ले गई, जबकि दूसरी ने सो रही जहीर की पत्नी की गोद से बच्चे को चुराकर फरार हो गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 72 घंटे में खुलासा
हरिद्वार SSP प्रमेंद्र डोबाल ने तत्काल मुकदमा दर्ज करने और बच्चे की तलाश के लिए कलियर और आसपास के थानों की संयुक्त टीमें गठित करने के निर्देश दिए। CIU रुड़की को तकनीकी सहायता के लिए शामिल किया गया। पुलिस ने मैनुअल और डिजिटल साक्ष्यों का पीछा करते हुए मेरठ पहुंचकर निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार किया:
- आस मोहम्मद लंगड़ा (36, मेरठ) – मुख्य साजिशकर्ता।
- शहनाज (35, आस मोहम्मद की पत्नी) – चोरी में शामिल।
- सलमा (26, मेरठ) – दूसरी महिला जो चोरी में शामिल थी।
- अंचन (40, मेरठ) – बच्चे को खरीदने वाली।
- नेहा शर्मा (35, मेरठ) – पेसेंट कोऑर्डिनेटर, बच्चे को बेचने वाली।
- विशाल गुप्ता उर्फ अच्ची (39, मेरठ) – अंतिम खरीदार।
बच्चा चोरी की चेन: 4.9 लाख में बिका बच्चा
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह एक संगठित गिरोह था:
- आस मोहम्मद ने बच्चे को चुराने के बाद स्विफ्ट डिजायर कार से शहनाज और सलमा को मेरठ ले गया।
- बच्चा 3 लाख रुपये में अंचन को बेचा गया।
- अंचन ने 3.9 लाख रुपये में नेहा शर्मा को बेचा।
- नेहा ने 1 लाख का मुनाफा कमाकर बच्चे को 4.9 लाख रुपये में विशाल गुप्ता को बेच दिया।
विशाल गुप्ता और उनकी पत्नी को 10 साल से संतान नहीं थी। वे मेरठ के एक अस्पताल में इलाज करा रहे थे, जहां नेहा शर्मा पेसेंट कोऑर्डिनेटर थी। नेहा ने विशाल की बात सुनकर बच्चा चोरी की साजिश रची।
बच्चे का सकुशल रेस्क्यू
पुलिस ने 55 घंटे में मुखबिर तंत्र और सघन पूछताछ के आधार पर बच्चे को विशाल गुप्ता के घर से सकुशल छुड़ाया। SSP प्रमेंद्र डोबाल ने बताया, “मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मैंने स्वयं मॉनिटरिंग की। 72 घंटे में बच्चा माता-पिता को सौंप दिया गया और सभी आरोपी हिरासत में हैं।” आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
- संगठित अपराध: यह घटना बच्चा चोरी के संगठित गिरोहों की गंभीरता को दर्शाती है, जो धार्मिक स्थलों जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को निशाना बनाते हैं।
- पुलिस की सतर्कता: 72 घंटे में ब्लाइंड केस का खुलासा और बच्चे का रेस्क्यू पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है।
- जागरूकता की जरूरत: स्थानीय लोगों ने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाने और CCTV निगरानी की मांग की।







