
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सहारनपुर रोड पर स्थित मां डाट काली मंदिर आस्था और विश्वास का एक ऐसा केंद्र है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास स्थित यह मंदिर नौ शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
हर गुजरने वाला करता है दर्शन
सड़क किनारे स्थित होने के कारण इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां से गुजरने वाला लगभग हर व्यक्ति मां के दर्शन जरूर करता है।
नई गाड़ी खरीदने, विवाह या किसी भी शुभ कार्य से पहले लोग यहां आकर चुनरी चढ़ाते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
देश-विदेश तक जाता है प्रसाद
सिद्धपीठ होने के चलते यहां का प्रसाद, धागा, चुन्नी, सिंदूर और मंत्रित भस्म की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक रहती है।
भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां आकर विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन भी करते हैं।
मंदिर से जुड़ी रोचक कथा
मान्यता है कि जहां आज मंदिर स्थित है, वह क्षेत्र कभी शिवालिक पर्वत का हिस्सा था।
मंदिर का प्रारंभिक निर्माण वर्ष 1804 में महंत सुखबीर गुसाईं ने कराया था।
कहा जाता है कि अंग्रेजों के समय जब यहां सुरंग निर्माण का कार्य चल रहा था, तो बार-बार बाधाएं आ रही थीं।
एक दिन एक अंग्रेज इंजीनियर को मां ने स्वप्न में दर्शन दिए और मंदिर निर्माण का आदेश दिया। इसके बाद 1936 में मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और फिर सुरंग निर्माण का कार्य आसानी से पूरा हो सका।
चार पहर की आरती और अखंड ज्योत
मंदिर में दिनभर चार समय आरती होती है—
सुबह श्रृंगार आरती, भोग आरती, पाठ आरती और रात में शयन आरती।
यहां अखंड ज्योत निरंतर जलती रहती है, जो भक्तों के विश्वास का प्रतीक है।
कैसे पहुंचे मंदिर
देहरादून रेलवे स्टेशन से लगभग 13 किलोमीटर और आईएसबीटी से करीब 8 किलोमीटर दूरी पर यह मंदिर सहारनपुर रोड पर स्थित है।
बस, ऑटो और निजी वाहन से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मंदिर के महंत रमन प्रसाद गोस्वामी के अनुसार, सच्चे मन से आने वाले भक्त की हर मनोकामना मां पूरी करती हैं।
वहीं सेवादार गौरव कुमार का कहना है कि यहां आने वाले लोगों को सनातन संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाता है।






