
ऋषिकेश: ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना में अब सिग्नल और टेलीकॉम से जुड़े अहम कार्यों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्टेशनों, सुरंगों और पुलों के निर्माण के साथ ही रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने तकनीकी ढांचे को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। 16 मार्च को सिग्नल से जुड़े टेंडर खोले जाएंगे, जबकि टेलीकॉम कार्य के तकनीकी टेंडर पहले ही खुल चुके हैं और वित्तीय टेंडर प्रक्रिया मार्च तक पूरी होने की संभावना है। परियोजना को दिसंबर 2028 तक कर्णप्रयाग तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
126 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण आरवीएनएल द्वारा किया जा रहा है। परियोजना के तहत कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
अब तक वीरभद्र और योगनगरी ऋषिकेश स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और यहां से ट्रेनों का संचालन भी जारी है। शिवपुरी और व्यासी स्टेशनों पर कार्य शुरू हो चुका है। देवप्रयाग से कर्णप्रयाग तक शेष आठ स्टेशनों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
स्टेशन, सुरंग और पुल निर्माण के साथ अब सिग्नल, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कार्यों को गति दी जा रही है।
सिग्नल और टेलीकॉम पर करोड़ों का निवेश
सिग्नल कार्य पर 165 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसके टेंडर 16 मार्च को खोले जाएंगे।
टेलीकॉम कार्य तीन चरणों में किया जाएगा।
- पहले चरण में 270 करोड़ रुपये
- दूसरे चरण में 221 करोड़ रुपये
- तीसरे चरण में 261 करोड़ रुपये
टेलीकॉम के तकनीकी टेंडर 15 दिसंबर को खुल चुके हैं और वित्तीय टेंडर मार्च तक खोले जाने की तैयारी है।
इसके अलावा 122 करोड़ रुपये की लागत से अर्थिंग कार्य के टेंडर 3 अप्रैल को खुलेंगे और मई के अंत तक काम शुरू किए जाने की योजना है।
ओएचई और अन्य कार्य
परियोजना में ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) का कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में श्रीनगर तक करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से काम होगा, जबकि इसके बाद समान लागत से कर्णप्रयाग तक विस्तार किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त पहले चरण में व्यासी तक जनरल पावर सप्लाई, फायर टेंडर और सुरंगों में वेंटिलेशन सिस्टम पर लगभग 434 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि रेल परियोजना में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिग्नल और टेलीकॉम से जुड़े कार्यों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तय समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए तेजी से काम चल रहा है।
आगे क्या होगा
मार्च और अप्रैल में टेंडर प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विभिन्न तकनीकी कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे। यदि सभी कार्य तय समय के अनुसार चलते रहे तो दिसंबर 2028 तक कर्णप्रयाग तक रेल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
यह परियोजना गढ़वाल क्षेत्र की कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
यदि आपके क्षेत्र में कोई घटना, समस्या या जानकारी हो तो हमें ईमेल या फोटो/वीडियो भेजें —
📩 rishikeshnews.com@gmail.com







