
देहरादून: प्रदेश में गणतंत्र दिवस परेड की गरिमा से जुड़ा एक गंभीर प्रशासनिक मामला सामने आया है। राष्ट्रीय पर्व के दौरान दो आईपीएस अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठे हैं—एक अधिकारी आधी-अधूरी सेरेमोनियल तैयारी के साथ परेड में पहुंचे, जबकि दूसरे ने परेड में शामिल होना ही मुनासिब नहीं समझा। मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की जिम्मेदारी आईजी मुख्यालय को सौंपी गई है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जानकारी के अनुसार, हरिद्वार में तैनात जितेंद्र मेहरा गणतंत्र दिवस परेड में सेरेमोनियल यूनिफॉर्म के बजाय नियमित यूनिफॉर्म में पहुंचे। जबकि देहरादून में तैनात कुश मिश्रा परेड में उपस्थित ही नहीं हुए। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में पुलिस रैतिक परेड के दौरान राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों के लिए सेरेमोनियल यूनिफॉर्म अनिवार्य होती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि दोनों अधिकारियों के आचरण का संज्ञान लिया गया है और उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच आईजी मुख्यालय को सौंपी गई है, जहां से परिस्थितियों और कारणों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पुलिस महकमे में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों पर अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होता है। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रमों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति पहले ही चर्चा में रही थी, ऐसे में अब यह मामला और गंभीर माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
जांच अधिकारी दोनों आईपीएस अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण लेंगे। स्पष्टीकरण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विभागीय स्तर पर यह भी देखा जाएगा कि प्रोटोकॉल उल्लंघन किन परिस्थितियों में हुआ और इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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