
देहरादून: राजधानी देहरादून में हालात ऐसे बन गए हैं कि अब गड्ढे सड़क पर नहीं, बल्कि सड़कें ही गड्ढों में बदल चुकी हैं। शहर में चल रही अंधाधुंध और अनियोजित खोदाई ने न सिर्फ यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया है, बल्कि आम लोगों की जान को भी सीधा खतरे में डाल दिया है। सीवर, पेयजल और भूमिगत विद्युत लाइनों के नाम पर पूरे शहर को खोद दिया गया है। ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जहां सड़कों की हालत सामान्य कही जा सके। जनता अब सड़क के सहारे नहीं, बल्कि किस्मत के भरोसे सफर कर रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
देहरादून में विभिन्न परियोजनाओं के तहत एक साथ कई एजेंसियों द्वारा खुदाई कराई जा रही है। समन्वय और निगरानी के अभाव में सड़कों को बार-बार खोदा जा रहा है, लेकिन समय पर भरान और मरम्मत नहीं की जा रही। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर हफ्तों तक गड्ढे खुले पड़े रहते हैं। दिल्ली में हाल ही में गड्ढे में गिरने से पौड़ी निवासी युवक की मौत और नोएडा में इंजीनियर की मृत्यु के बाद भी देहरादून में कोई ठोस सबक लेते नहीं दिख रहा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी स्तर से खोदाई कार्यों को लेकर चेतावनियां और निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नजर नहीं आ रहा। शहर में दिन के समय खोदाई पर प्रतिबंध होने के बावजूद कई स्थानों पर खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
सरस्वतीपुरम मियांवाला में सीवर लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर बुजुर्ग कमलनयन के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने लोगों में आक्रोश भर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदार एजेंसियों का गंभीर अपराध है। लोगों का आरोप है कि न बैरिकेडिंग की जा रही है, न चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं और न ही रात के समय रोशनी की कोई व्यवस्था है। ऐसा लगता है जैसे हादसे का इंतजार किया जा रहा हो।
आगे क्या होगा
शहरवासियों की मांग है कि खोदाई कार्यों पर तत्काल सख्त निगरानी लागू की जाए, दोषी एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई हो और समयबद्ध तरीके से सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले बारिश के मौसम में हालात और भयावह हो सकते हैं और बड़े हादसों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
नहीं रुक रही घटनाएं
डालनवाला के कर्जन रोड पर स्कूल समय में प्रतिबंध के बावजूद दिनदहाड़े खोदाई किए जाने से जाम और अव्यवस्था आम हो चुकी है। इसी मार्ग से स्कूलों के छात्र और जिला अस्पताल जाने वाले मरीज गुजरते हैं, लेकिन न एजेंसियों को इसकी चिंता है और न ही प्रशासनिक सख्ती दिखाई दे रही है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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