
देहरादून: केंद्र सरकार उत्तराखंड में सबसे अधिक खर्च कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर कर रही है। इसमें दूरसंचार सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ रेल और सड़क-राजमार्ग निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। खास बात यह है कि राज्य में रेल और सड़क दोनों क्षेत्रों में किया जा रहा निवेश अब लगभग बराबरी के स्तर पर पहुंच चुका है। सरकार का मानना है कि पर्वतीय और सीमावर्ती राज्य के लिए मजबूत कनेक्टिविटी न केवल विकास, बल्कि आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में दूरस्थ गांवों तक पहुंच हमेशा एक चुनौती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सबसे पहले डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। दूरसंचार नेटवर्क, सड़कें और रेल परियोजनाएं इस रणनीति के मुख्य स्तंभ हैं, ताकि हर गांव तक संपर्क स्थापित किया जा सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र सरकार का पहला लक्ष्य उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि राज्य को दिए गए कुल 3.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश में से 2.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक सिर्फ टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के विकास पर खर्च किए जा रहे हैं। इससे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ेगी और आपदा जैसी परिस्थितियों में पहाड़ी क्षेत्रों से संवाद आसान होगा।
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स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क, सड़क और रेल संपर्क बेहतर होने से न केवल आमजन को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में 4जी नेटवर्क के विस्तार से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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आंकड़े और तथ्य
कनेक्टिविटी से जुड़े निवेश में दूरसंचार विभाग पर सबसे अधिक 2.38 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद रेल मंत्रालय की दो प्रमुख परियोजनाओं पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 23 परियोजनाओं पर करीब 37,500 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है।
राज्य की प्रमुख परियोजनाओं में ऋषिकेश–कर्णप्रयाग नई रेल लाइन (38,953 करोड़ रुपये) और पहाड़ी क्षेत्रों में 4जी मोबाइल कवरेज परियोजना (30,620 करोड़ रुपये) सबसे बड़े बजट वाली योजनाएं हैं।
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आगे क्या होगा
सरकार का मानना है कि सड़क और रेल नेटवर्क के विस्तार से चारधाम यात्रा, सीमावर्ती इलाकों की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तराखंड में विकास के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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