
रानीपोखरी: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान रानीपोखरी क्षेत्र में परिवहन विभाग की जांच ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया। जांच के दौरान एक 14 सीटर वाहन में 30 स्कूली बच्चों को ठूंसकर ले जाया जा रहा था, जो न सिर्फ सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है बल्कि बच्चों की जान के साथ खुला जोखिम भी। हैरानी की बात यह रही कि इस खतरनाक स्थिति के बावजूद परिवहन विभाग की टीम ने वाहन को सीज करने के बजाय सिर्फ चालान काटकर छोड़ दिया। यह मामला स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता के साथ-साथ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
शुक्रवार को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत परिवहन विभाग की बाइक स्क्वायड टीम रानीपोखरी क्षेत्र में वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान भट्टनगरी की ओर से हाईवे पर आ रहे एक वाहन को रोका गया। जांच में सामने आया कि वाहन में क्षमता से दोगुने से भी अधिक बच्चे सवार थे। पूछताछ के दौरान चालक ने बताया कि वह रानीपोखरी के एक स्कूल के बच्चों को लाता-ले जाता है। जब उससे पूछा गया कि वाहन को स्कूल वाहन के रूप में पंजीकृत क्यों नहीं कराया गया, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
परिवहन निरीक्षक जेठू सिंह ने बताया कि संबंधित 14 सीटर वाहन में 30 बच्चों को बैठाया गया था, जिस पर 1500 रुपये का ऑनलाइन चालान काटा गया है। चालक को निर्देश दिए गए हैं कि वाहन को स्कूल वैन के रूप में पंजीकृत कराया जाए, उसमें सुरक्षा जाली और अग्निशमन यंत्र लगाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वाहन दोबारा नियमों के विरुद्ध पाया गया तो उसे सीज किया जाएगा।
वहीं, एआरटीओ प्रशासन ऋषिकेश रावत सिंह कटारिया ने कहा कि “स्कूली छात्रों के जीवन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी वाहन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय ऐसे वाहन अक्सर दिखाई देते हैं, जिनमें बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। अभिभावकों का भी मानना है कि सिर्फ चालान काटना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इससे स्कूल संचालकों और वाहन मालिकों पर कोई ठोस असर नहीं पड़ता।
आंकड़े और तथ्य
रानीपोखरी और ऋषिकेश क्षेत्र में कई स्कूल वाहनों में न तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही अग्निशमन सिलिंडर। कुछ वाहनों में लगे उपकरण या तो खराब हैं या उनकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद अधिकांश मामलों में वाहनों को सीज करने के बजाय केवल चालान काटकर छोड़ दिया जाता है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
21 नवंबर 2025 को खदरी खड़कमाफ क्षेत्र में एक स्कूल के छात्र व्यावसायिक वाहन से ले जाए जा रहे थे, जिसमें सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे और बच्चे हाथ-गर्दन बाहर निकालकर बैठे थे।
इसी तरह, 5 जनवरी को ऋषिकेश में शैक्षिक भ्रमण पर आए राजस्थान के धौलपुर जिले के 100 छात्रों को 32 स्लीपर सीटर बस में बैठाया गया था, जिसे बाद में पकड़कर सीज किया गया।







