
नैनीताल: शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में दर्ज मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आरोपी युवक को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि यदि आरोपी की गिरफ्तारी होती है तो उसे निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जाएगा। अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मामला हरिद्वार जनपद का है, जहां पीड़िता ने एक युवक पर शादी का झांसा देकर झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। इसी प्रकरण में आरोपी ने गिरफ्तारी से संरक्षण के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी की मंशा शुरू से ही शादी करने की थी। उन्होंने यह भी दलील दी कि युवक और युवती के बीच बाकायदा ‘रोका’ रस्म संपन्न हो चुकी थी, लेकिन बाद में आपसी विवादों के चलते रिश्ता टूट गया। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी आज भी शादी के लिए तैयार है, जबकि शिकायतकर्ता अब इसके लिए तैयार नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया, हालांकि यह स्वीकार किया गया कि रिकॉर्ड में दोनों पक्षों के बीच ‘रोका’ समारोह का उल्लेख मौजूद है।
कोर्ट का आदेश
अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद आरोपी को अग्रिम जमानत का हकदार माना। कोर्ट ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो प्रतिभूतियों पर जमानत पर रिहा किया जाएगा।
जमानत की शर्तें
अदालत ने जमानत देते समय सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह या पीड़िता को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा। इसके अलावा आरोपी को अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी के पास जमा करना होगा और अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में अभियोजन पक्ष को जमानत रद्द कराने का अधिकार होगा।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच निचली अदालत और पुलिस स्तर पर जारी रहेगी। जांच के दौरान आरोपी को अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।







