
देहरादून: जनपद ऊधमसिंह नगर के प्राग फार्म क्षेत्र में 1354.14 एकड़ भूमि पर औद्योगिक गतिविधियों का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने इस भूमि से जुड़े शासनादेश में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से राज्य में नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा उद्योगों के विस्तार के लिए लंबे समय से चली आ रही भूमि की कमी दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है। औद्योगिक कोरिडोर के समीप होने के कारण इस क्षेत्र में औद्योगिकीकरण की संभावनाएं भी काफी अधिक मानी जा रही हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
औद्योगिक आस्थान विकसित करने के उद्देश्य से यह भूमि पहले ही सिडकुल को हस्तांतरित की जा चुकी थी। इसके लिए 25 मार्च 2025 को शासनादेश जारी हुआ था। हालांकि उस समय जारी शर्तों के अनुसार सिडकुल को आवंटित भूमि को किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन को बेचने, पट्टे पर देने या किसी अन्य रूप में हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं था। साथ ही यह शर्त भी थी कि आवंटन की तिथि से तीन वर्ष के भीतर भूमि का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए, अन्यथा आवंटन स्वतः निरस्त माना जाएगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
राज्य सरकार का कहना है कि बढ़ती औद्योगिक मांग और निवेशकों की रुचि को देखते हुए शासनादेश में संशोधन आवश्यक हो गया था। संशोधित प्रावधानों के तहत अब औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से, राजस्व विभाग की सहमति लेकर, सिडकुल को आवंटित भूमि को समान प्रयोजन के लिए उप-पट्टे (सब-लीज) पर देने का अधिकार मिल गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद सिडकुल अपनी विकसित औद्योगिक भूमि पर नए उद्योग स्थापित कर सकेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उद्योग जगत और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस निर्णय से ऊधमसिंह नगर क्षेत्र में निवेश का माहौल बेहतर होगा। स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है और छोटे-बड़े उद्योगों के आने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
आंकड़े और तथ्य
वर्तमान में उत्तराखंड में कुल 93,883 उद्योग स्थापित हैं, जिनमें 330 बड़े उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों के माध्यम से अब तक लगभग 55,588 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। इसके बावजूद उधमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जैसे मैदानी जिलों में औद्योगिक भूमि की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
आगे क्या होगा
सरकारी फैसले के बाद ऊधमसिंह नगर में 1300 एकड़ से अधिक भूमि पर सुनियोजित औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने का रास्ता खुलेगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी मजबूती मिलेगी और उत्तराखंड औद्योगिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा।




