
रुद्रप्रयाग: देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम पड़ाव सिद्धपीठ कालीमठ पहुंच गई है। यात्रा के कालीमठ पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छा गया। ढोल-दमाऊं की गूंज, देवी जयकारों और पारंपरिक लोकगीतों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवती कालीमाई के दिवारा का भावपूर्ण स्वागत किया, जिससे कालीमठ घाटी में धार्मिक उल्लास देखने को मिला।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रुद्रप्रयाग जिला भगवान शिव के प्राचीन मंदिरों और धार्मिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। यहां वर्ष भर विभिन्न मेलों और यात्राओं का आयोजन होता है, जिनमें स्थानीय लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा भी ऐसी ही एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है, जो वर्षों से क्षेत्रीय जनमानस की आस्था से जुड़ी हुई है।
दिवारा यात्रा का कालीमठ पहुंचना
भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा ने अपने पैदल मार्ग में पड़ने वाले अनेक गांवों में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। कालीमठ पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने देवी के दिवारा का पारंपरिक विधि-विधान के साथ स्वागत किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
श्रद्धालुओं का कहना है कि दिवारा यात्रा के कालीमठ पहुंचने से पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
आधिकारिक जानकारी
कालीमाई दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने बताया कि यह यात्रा क्षेत्र में सुख, शांति और प्राकृतिक संतुलन की कामना के उद्देश्य से निकाली जाती है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा लोक संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण है। उनके अनुसार, विगत वर्ष 7 दिसंबर को 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया था।
यात्रा का प्रथम चरण होगा संपन्न
दिवारा यात्रा के सिद्धपीठ कालीमठ पहुंचने के उपरांत सायंकाल विशेष पूजा-अर्चना, देवी स्तुति और जागरण का आयोजन किया जाएगा। बुधवार को विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर दिवारा यात्रा के प्रथम चरण का विधिवत समापन किया जाएगा। समापन अवसर पर हवन, देवी आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
आगे क्या होगा
यात्रा के प्रथम चरण के समापन के बाद समिति द्वारा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी। कालीमठ में दिवारा यात्रा के समापन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति भाव बना हुआ है।







