
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें कोश्यारी का नाम शामिल किया गया है। उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे भगत सिंह कोश्यारी न केवल राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, बल्कि महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने संवैधानिक दायित्व निभाया है। उनके चयन को उत्तराखंड के लिए सम्मान और गौरव के रूप में देखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर संवैधानिक पदों तक का लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय किया है। गरीब परिवार से निकलकर उन्होंने शिक्षा, संगठन और राजनीति के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वे अंतरिम सरकार और बाद में निर्वाचित सरकार में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे।
राजनीतिक सफर की झलक
कोश्यारी ने अपनी कर्मभूमि पिथौरागढ़ को बनाया। प्रारंभिक जीवन खेती पर आधारित परिवार में बीता और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बाधा नहीं बनने दिया। प्राथमिक शिक्षा महरगाड़ से, जूनियर हाईस्कूल शामा से, हाईस्कूल कपकोट से और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पिथौरागढ़ से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अल्मोड़ा महाविद्यालय से बीए और एमए (अंग्रेजी) की पढ़ाई की।
वर्ष 1966 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया। आरएसएस के प्रचारक के रूप में उन्होंने पिथौरागढ़ में वर्ष 1977 में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की और लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया।
आधिकारिक और राजनीतिक भूमिकाएं
छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले भगत सिंह कोश्यारी ने वर्ष 1989 में अल्मोड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। भले ही उन्हें उस चुनाव में सफलता न मिली हो, लेकिन उन्होंने जनसंपर्क और संगठनात्मक कार्य को लगातार जारी रखा। वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे और उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में ऊर्जा, सिंचाई और संसदीय कार्य मंत्री बने। इसके बाद उन्हें अंतरिम सरकार में मुख्यमंत्री बनने का अवसर भी मिला।
कोश्यारी राज्यसभा और लोकसभा दोनों के सदस्य रहे। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक योगदान को देखते हुए पार्टी ने उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया, जहां उन्होंने संवैधानिक मर्यादाओं के तहत अपना कार्यकाल पूरा किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में पद्मभूषण सम्मान की घोषणा के बाद खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों और समर्थकों का कहना है कि यह सम्मान भगत सिंह कोश्यारी के संघर्ष, समर्पण और सार्वजनिक जीवन में दिए गए योगदान की पहचान है।
आगे क्या होगा
पद्मभूषण सम्मान औपचारिक रूप से राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस सम्मान के साथ भगत सिंह कोश्यारी का नाम देश के विशिष्ट नागरिकों की सूची में दर्ज हो जाएगा, जिसे उत्तराखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।







