
रुद्रप्रयाग जनपद में पंच केदारों के चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुलने की तिथि का विधिवत ऐलान शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ज्योर्तिमठ में किया गया। पूजा-पाठ और पंचांग गणना के बाद निर्णय लिया गया कि इस वर्ष 18 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर भगवान रुद्रनाथ के कपाट देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। तिथि की घोषणा के साथ ही रुद्रनाथ यात्रा की तैयारियों ने गति पकड़ ली है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पंच केदारों में भगवान रुद्रनाथ का विशेष धार्मिक महत्व है। शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद रहने के बाद हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु में विधिवत पूजा-अर्चना और पंचांग गणना के आधार पर कपाट खोलने की तिथि घोषित की जाती है। बसंत पंचमी पर यह घोषणा परंपरागत रूप से की जाती है, जिससे यात्रा व्यवस्थाओं की रूपरेखा तय हो सके।
कपाट खुलने की तिथि और समय
मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष भगवान रुद्रनाथ के कपाट 18 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खोले जाएंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रुद्रनाथ धाम पहुंचने की संभावना है।
डोली यात्रा का कार्यक्रम
भगवान रुद्रनाथ की डोली 15 मई को शीतकालीन गद्दीस्थल से बाहर निकलेगी। 15 और 16 मई को डोली का विश्राम होगा। 17 मई को सुबह 8 बजे डोली गोपीनाथ मंदिर से अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान कर ग्वांड गांव की ओर रवाना होगी। रात्रि विश्राम लुल्टी बुग्याल और पुंगु बुग्याल में होगा। अगले दिन यात्रा पित्राधार होते हुए 18 मई को रुद्रनाथ धाम पहुंचेगी और निर्धारित समय पर कपाटोद्घाटन किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और व्यवस्थाओं की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों से रुद्रनाथ धाम में देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर समिति के मुख्य पुजारी का कहना है कि यात्रा के दौरान पानी और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से धाम और पड़ावों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है।
प्रशासन और समिति के सामने प्रमुख चुनौतियां
मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार रुद्रनाथ धाम में ठहरने की सीमित व्यवस्था है, जहां एक समय में करीब 100 लोगों के रुकने की सुविधा है। ऐसे में विभिन्न गांवों में वैकल्पिक ठहराव की व्यवस्था जिला प्रशासन को करनी होगी, ताकि भीड़ का दबाव कम हो और स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल सके। समिति ने यह भी बताया कि हाल के समय में क्षेत्र में वन्यजीवों के कारण मंदिर और आसपास के इलाकों में नुकसान हुआ है, जिससे व्यवस्थाएं जुटाने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रुद्रनाथ यात्रा क्षेत्र के लिए आजीविका का बड़ा साधन है, लेकिन अव्यवस्था और गंदगी से धाम की छवि प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते ठोस व्यवस्थाएं करने और सोशल मीडिया रील्स के लिए आने वाले कुछ यात्रियों से फैल रही अव्यवस्था पर नियंत्रण की मांग की है।
आगे क्या होगा
कपाटोद्घाटन की तिथि घोषित होने के बाद अब मंदिर समिति और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए। आने वाले दिनों में यात्रा मार्ग, ठहराव, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर विस्तृत तैयारियां की जाएंगी।






