
देहरादून: पांवटा साहिब राजमार्ग पर नंदा की चौकी क्षेत्र में टौंस नदी पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का निर्माण कार्य आखिरकार चार माह के लंबे इंतजार के बाद शुरू कर दिया गया है। बीते वर्ष अतिवृष्टि में क्षतिग्रस्त हुए इस पुल के कारण राजमार्ग पर यातायात लंबे समय से प्रभावित था। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में लोक निर्माण विभाग को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन अब ठेका कंपनी का चयन कर अनुबंध पूरा कर लिया गया है और मौके पर निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। यह कार्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे क्षेत्रीय यातायात, पर्यटन और स्थानीय आवाजाही को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
15 सितंबर की मध्य रात्रि को हुई अतिवृष्टि में टौंस नदी पर बना नंदा की चौकी पुल का एक हिस्सा ढह गया था। इसके चलते पांवटा साहिब राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी। कुछ दिनों बाद अस्थाई व्यवस्था के तहत नदी के एक हिस्से पर ह्यूम पाइप डालकर पुलिया बनाई गई, जिससे सीमित यातायात संचालित किया जा रहा है। स्थायी समाधान के लिए लोनिवि द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई थी।
आधिकारिक जानकारी
लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार के अनुसार पुल के पुनर्निर्माण के लिए हिमालयन कंस्ट्रक्शन का चयन किया गया है। करीब 16 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले इस कार्य को चार माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले पुल को यातायात के लिए खोल दिया जाए।
टेंडर प्रक्रिया में आई बाधाएं
पुल के क्षतिग्रस्त एबटमेंट वाल के नए सिरे से निर्माण के लिए नवंबर माह में टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। शुरुआती दौर में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से टेंडर अवधि बढ़ानी पड़ी और एक बार इसे निरस्त भी करना पड़ा। हालांकि इसके बाद महज तीन दिनों के भीतर नई टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कंपनी का चयन किया गया और अनुबंध के साथ निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।
33 साल बाद दूर होगी पुरानी खामी
यह पुल वर्ष 1992 में बनाया गया था। लोनिवि के परीक्षण में सामने आया कि अतिवृष्टि के दौरान पानी के तेज बहाव ने किनारे की एबटमेंट वाल को क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि बीच के पिलर सुरक्षित रहे। जांच में यह भी पाया गया कि क्षतिग्रस्त एबटमेंट वाल और देहरादून छोर की वाल ओपन फाउंडेशन पर आधारित थीं, जबकि बीच के पिलर वेल फाउंडेशन पर बने थे।
नया डिजाइन और सुरक्षा प्रावधान
लोनिवि अधिकारियों के अनुसार अब पुल की मरम्मत के डिजाइन में ओपन फाउंडेशन की जगह वेल फाउंडेशन का प्रावधान किया गया है। नए फाउंडेशन की गहराई 20 मीटर से अधिक होगी, जबकि पहले ओपन फाउंडेशन की गहराई लगभग पांच मीटर थी। इसके साथ ही परियोजना में अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान भी जोड़े गए हैं, ताकि भविष्य में नदी के तेज बहाव से पुल को नुकसान न पहुंचे।
आगे क्या होगा
निर्माण कार्य पूरा होने तक अस्थाई व्यवस्था के तहत यातायात संचालित किया जाएगा। विभाग का दावा है कि तय समयसीमा के भीतर पुल का पुनर्निर्माण पूरा कर राजमार्ग को पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को स्थायी राहत मिल सके।






